अलनीनो का समुद्री तापमान बढ़ने से मछली पालन और तटीय क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ने की आशंका- आईएनसीओआईएस
नई दिल्ली, 23 जून (हि.स.)।
भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने समुद्री क्षेत्रों के लिए अल नीनो पर अपनी पहली विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में समुद्री हालात कई तरह से प्रभावित हो सकते हैं। यह बुलेटिन चेवेल्ला सांसद कोंडा विश्वेशवर रेड्डी ने जारी किया। संस्थान के अनुसार, अल नीनो की स्थिति अभी सक्रिय है और इसके नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच चरम पर पहुंचने की संभावना है। इसके प्रभाव से भारतीय महासागर क्षेत्र में समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है और यह स्थिति अप्रैल–मई 2027 तक जारी रह सकती है।
मंगलवार को आईएनसीओआईएस ने अपने बुलेटिन में कहा है कि समुद्र का तापमान बढ़ने से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है। इसके कारण कोरल रीफ (प्रवाल भित्तियों) में सफेदी और नुकसान की घटनाएं बढ़ सकती हैं
। इसके साथ समुद्री हीटवेव की घटनाएं अधिक हो सकती हैं। सार्डिन और मैकरल जैसी मछलियों की उपलब्धता और पकड़ में कमी आ सकती है। इसके साथ मछलियों के प्रवास और वृद्धि पर भी असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में समुद्र अधिक उग्र रह सकता है, जिससे भारत के पूर्वी तट पर तटीय कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, अरब सागर और पश्चिमी तट पर समुद्र अपेक्षाकृत शांत रहने की संभावना है, जिससे वहां समुद्री गतिविधियों के लिए कुछ हद तक बेहतर परिस्थितियां बन सकती हैं।
आईएनसीओआईएस ने मछुआरों, बंदरगाहों, शिपिंग कंपनियों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से जारी होने वाले अलर्ट और बुलेटिन पर नजर रखें और आवश्यक सावधानी बरतें।
संस्थान ने यह भी बताया कि अगला विशेष अल नीनो बुलेटिन जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में जारी किया जाएगा, जिसमें स्थिति के और अपडेट दिए जाएंगे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

