देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, मौसम विभाग की शुरुआती रिपोर्ट जारी
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (हि.स.)। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 को लेकर शुरुआती पूर्वानुमान जारी किया है। इस बार देश में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।
जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल वर्षा लगभग 92 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड एवरेज (यानी किसी क्षेत्र में एक निश्चित अवधि में 30 या 50 वर्षों की दर्ज की गई औसत वर्षा) रहने का अनुमान है, जिसमें ±5 प्रतिशत की संभावित त्रुटि हो सकती है। देश के लिए एलपीए (1971–2020 के आधार पर) 87 सेंटीमीटर तय है।
आईएमडी ने सोमवार को जारी पूर्वानुमान में बताया कि फिलहाल प्रशांत महासागर में कमजोर ला नीना जैसी स्थिति बनी हुई है, जो धीरे-धीरे ईएनएसओ न्यूट्रल की ओर बढ़ रही है। हालांकि, मानसून सीजन के दौरान एल नीनो बनने की संभावना जताई गई है, जो बारिश को प्रभावित कर सकता है।
हिंद महासागर में इस समय इंडियन ओसियन डायपोल (आईओडी) न्यूट्रल स्थिति है, लेकिन मानसून के अंत तक पॉजिटिव आईओडी विकसित होने की संभावना है।
इसके अलावा जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का आवरण सामान्य से थोड़ा कम दर्ज किया गया है, जिसका असर भी मानसून पर पड़ सकता है।
आईएमडी ने कहा है कि मानसून 2026 का अगला अपडेट मई के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ला नीना प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाली एक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें भूमध्यरेखीय पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है। यह अल नीनो का विपरीत चरण है, जो हर 3-5 साल में सक्रिय होता है और वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है। ला नीना से भारत में अच्छी बारिश और कड़ाके की ठंड की संभावना रहती है।
ईएनएसओ (अल नीनो-दक्षिणी दोलन) न्यूट्रल वह चरण है जब उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान एल नीनो (गर्म) या ला नीना (ठंडा) के बीच सामान्य (0.5°C से -0.5°C विसंगति) रहता है। इसमें सामान्य व्यापारिक हवाएं चलती हैं, जिससे मौसम की चरम स्थितियां (सूखा/बाढ़) कम होने की संभावना रहती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

