स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग के लिए स्मार्ट एआई सहायक विकसित कर रहा आईआईटी जोधपुर

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स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग के लिए स्मार्ट एआई सहायक विकसित कर रहा आईआईटी जोधपुर


जोधपुर, 15 सितम्बर (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर में ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सहायक विकसित करने की दिशा में शोध किया जा रहा है, जो तस्वीर, दस्तावेज, आवाज, पाठ और सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एक साथ समझकर वास्तविक जीवन के कार्यों में उपयोगी सहायता दे सकें।

यह शोध कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. दिव्या सक्सेना के नेतृत्व में मशीन इंटेलिजेंस प्रयोगशाला में किया जा रहा है। शोध का प्रमुख उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों को अधिक तेज, किफायती, व्यावहारिक और कम संसाधनों में संचालित करने योग्य बनाना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसी प्रणाली चिकित्सकों को चिकित्सा चित्रों, जांच रिपोर्ट और मरीज से जुड़ी अन्य जानकारी को एक साथ समझने में सहायता कर सकती है। उद्योगों में मशीन की तस्वीर, सेंसर आंकड़े, मशीन के अभिलेख और तकनीकी पुस्तिकाओं का विश्लेषण कर खराबी का पता लगाने तथा उसके समाधान में मदद मिल सकती है। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी इसके व्यापक उपयोग की संभावनाएं हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहायक शोध पत्रों, दस्तावेजों और अध्ययन सामग्री को समझकर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। डॉ. दिव्या सक्सेना ने बताया कि उद्देश्य ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियां विकसित करना है, जो अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को समझ सकें और सीमित संसाधनों में वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी सहायता दे सकें।

एआई का भविष्य केवल बड़े मॉडल बनाने में नहीं बल्कि इसे किफायती, सुरक्षित और व्यापक स्तर पर उपयोगी बनाने में भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे तंत्र विकसित करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है, जो जानकारी, ज्ञान और विभिन्न साधनों को आपस में जोड़कर लोगों को वास्तविक जीवन के कार्य पूरे करने में सहायता दे सकें।

शोध के तीन प्रमुख आधारशोध के तीन प्रमुख आधार बहुआयामी अधिगम, दक्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक हैं। बहुआयामी अधिगम के माध्यम से अलग-अलग प्रकार की जानकारी को एक साथ समझने, दक्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से कम संसाधनों में तेजी से काम करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायकों के माध्यम से केवल सवालों के जवाब देने के बजाय विभिन्न साधनों व उपलब्ध जानकारी का उपयोग कर पूरे कार्य को पूरा करने में सहायता देने पर जोर दिया जा रहा है।

शोध का एक महत्वपूर्ण पक्ष ऐसी प्रणालियां विकसित करना भी है, जिन्हें अस्पताल, कारखाने या कम इंटरनेट सुविधा वाले ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर संचालित किया जा सके। इसके लिए कम कंप्यूटिंग संसाधनों की आवश्यकता वाले छोटे और तेज कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल विकसित करने पर काम किया जा रहा है।------

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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