पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने की 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में

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पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने की 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में


पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने की 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में


नई दिल्ली, 16 जुलाई (हि.स.)। केन्द्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों ने देश में खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें से 94 प्रतिशत जलवायु-अनुकूल हैं तथा 29 जैव-सुदृढ़ीकृत (बायोफोर्टिफाइड) किस्में हैं। उन्होंने मांग-आधारित अनुसंधान, जलवायु-अनुकूल कृषि, दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण तथा कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) नेटवर्क के माध्यम से नवाचारों के व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

गुरुवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वां स्थापना दिवस के मौके पर अपने संबोधन में केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले 98 वर्षों में आईसीएआर ने भारत की कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार प्रणाली को सुदृढ़ बनाने, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने, उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आजीविका में सुधार करने तथा देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, तथा कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य के.वी. राजू तथा मत्स्य पालन विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) नेटवर्क के माध्यम से अनुसंधान की पहुंच का विस्तार करने का आह्वान किया ताकि प्रयोगशालाओं से किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक प्रौद्योगिकियों का तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा आईसीएआर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी प्रसार को और मजबूती मिलेगी, जिससे किसानों की समृद्धि तेज होगी और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायता मिलेगी।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्रों में हासिल उल्लेखनीय प्रगति किसानों के कल्याण और ग्रामीण समृद्धि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भाकृअनुप वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि भारत की खाद्य संकट से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विज्ञान-आधारित अनुसंधान, प्राकृतिक खेती तथा किसान-केन्द्रित नवाचार जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार तथा दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने वर्ष 2025-26 में फसलों, बागवानी, पशुधन तथा मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि से वर्ष के दौरान लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ, जिसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55,000 करोड़ रुपये रहा।डॉ. जाट ने आगे बताया कि वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियां प्रत्यक्ष रूप से लगभग एक करोड़ किसानों तक तथा मीडिया एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचीं, जबकि 18 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) ने आईसीएआर के वैश्विक सहयोग को मजबूत किया।

इस अवसर पर 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों तथा 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। नई प्रौद्योगिकियों में बासमती धान और लवणीय एवं क्षारीय मिट्टियों के प्रति सहनशील जलवायु-अनुकूल धान की किस्में, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन प्रौद्योगिकी, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन रोग एटलस तथा लघु किसानों के लिए किफायती कसावा हार्वेस्टर शामिल हैं।

साथ ही, 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनकी सेवाओं का नियमितीकरण किया गया।

प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तथा अंतिम छोर तक उसकी पहुंच को गति देने के उद्देश्य से 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे आईसीएआर द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का किसानों तक तेज़ी से हस्तांतरण सुनिश्चित होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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