पुणे के कथित मुंडवा जमीन घोटाले में पार्थ पवार को राहत
मुंबई, 02 फरवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र के पुणे जिले के बहुचर्चित मुंडवा जमीन घोटाले में सोमवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार और उनके सहयोगी दिग्विजय पाटिल को बड़ी राहत मिली है। पुणे की खडक़ क्राइम ब्रांच की ओर से आज पुणे अदालत में पेश की गई 1886 पन्नों की चार्जशीट में सिर्फ शीतल तेजवानी को आरोपित बनाया गया है।
इस मामले की छानबीन कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुणे के मुंडवा जमीन घोटाले की 1886 पन्नों की चार्जशीट आज अदालत में पेश की गई है। अब तक जांच के अनुसार चार्जशीट में शीतल तेजवानी ही मुख्य आरोपित हैं। जबकि अब तक की जांच में पार्थ पवार और उनके सहयोगी का कहीं सहभाग के तथ्य नहीं मिले हैं।
समाजसेविका अंजली दमानिया ने इस चार्जशीट पर सवाल खड़ा किया है। अंजली दमानिया ने कहा कि क्या महाराष्ट्र सिर्फ़ राजनीतिक दलाली का अड्डा बन गया है? क्या क़ानून सिर्फ़ आम आदमी के लिए है? क्या नेताओं के लिए ‘न्याय’ शब्द खत्म हो गया है? इस चार्जशीट का मतलब बड़े लोगों के लिए न्याय का कोई अर्थ शेष नहीं बचा है, जबकि गरीब लोगों को न्याय की कड़ी फटकार पड़ती है। पुणे ज़मीन घोटाले में खडक़ पुलिस ने चार्जशीट फाइल की है, लेकिन वह भी सिर्फ शीतल तेजवानी के खिलाफ! तो फिर दिग्विजय पाटिल और पार्थ पवार के खिलाफ जांच का क्या? क्या न्याय सेलेक्टिव है? यह न्याय नहीं है, यह न्याय का मजाक है।
उल्लेखनीय है कि पुणे में स्थित मुंडवा में किसी खास वर्ग को दी गई जमीन को शीतल तेजवानी ने पार्थ पवार और उनके सहयोगी की कंपनी अल्प दर पर बेच दिया था। इस जमीन की खरीदी-बिक्री प्रकाश में आने के बाद अंजली दमानिया ने इस मामले को उजागर किया था। उस समय पार्थ पवार पर जमीन सस्ती दर पर खरीदने और उस जमीन का राजस्व शुल्क तक माफ कर देने का भी आरोप लगा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मामले की जांच खडक़ क्राइम ब्रांच को सौपी गई थी। इस मामले में राजस्व विभाग के अधिकारी और शीतल तेजवानी को गिरफ्तार किया गया है और मामले की छानबीन जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

