अनुच्छेद 370 पर महबूबा मुफ्ती के बयान की शांता कुमार ने की आलोचना

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शिमला, 31 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती द्वारा अनुच्छेद 370 को पुनः लागू कराने के लिए आंदोलन शुरू करने की घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस बयान से उन्हें दुख और आश्चर्य दोनों हुआ है।

शांता कुमार ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि अनुच्छेद 370 भारत के माथे पर एक बड़ा कलंक था, जिसे हटाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हुआ और उनके त्याग को देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि भारत के माथे से मिटा यह कलंक अब दुनिया की कोई भी शक्ति दोबारा नहीं लगा सकती।

उन्होंने महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधते हुए कहा कि वे चाहे जितना प्रयास कर लें, अनुच्छेद 370 दोबारा लागू नहीं हो सकता। उनका कहना था कि देश का कोई भी राष्ट्रभक्त इसे फिर से लागू किए जाने का समर्थन नहीं करेगा।

शांता कुमार ने अपने कश्मीर आंदोलन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्ष 1953 में मात्र 19 वर्ष की आयु में उन्होंने कश्मीर आंदोलन में सत्याग्रह किया था। इस दौरान उन्हें गुरदासपुर जेल में अन्य सत्याग्रहियों के साथ रखा गया। बाद में कम आयु के 22 सत्याग्रहियों को जून की भीषण गर्मी में हिसार जेल भेजा गया, जहां उन्होंने लगभग आठ महीने जेल में बिताए।

उन्होंने बताया कि उस आंदोलन में करीब 80 हजार कार्यकर्ता जेल गए थे। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान के बाद भी लंबे समय तक अनुच्छेद 370 बना रहा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे समाप्त कर भारत के माथे से यह कलंक हमेशा के लिए मिटा दिया गया।

शांता कुमार ने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि महबूबा मुफ्ती को सद्बुद्धि प्रदान करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

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