हाई कोर्ट से पंजाब सरकार को झटका : दो सप्ताह में कर्मियों एवं पेंशनरों का डीए चुकाने का आदेश

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चंडीगढ़, 03 अगस्त (हि.स.)। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को बड़ा झटका देते हुए करीब छह लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का लंबित महंगाई भत्ता बकाया 15 दिनों के भीतर जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने राज्य सरकार की लेटर्स पेटेंट अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के पहले के फैसले को बरकरार रखा।

इस आदेश को लागू करने से पंजाब सरकार पर करीब 14,191 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव को भुगतान पूरा होने के बाद शपथपत्र दाखिल कर आदेश के पालन की जानकारी देने को भी कहा है।

अदालत ने लंबित बकाया चुकाए जाने तक पंजाब सरकार को बड़े विज्ञापन अभियानों और गैर-जरूरी योजनाओं पर खर्च करने से भी रोक दिया है। आदेश के अनुसार निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर लंबित राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया जा सकता है।

यह मामला राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को अखिल भारतीय सेवाओं तथा न्यायिक अधिकारियों के समान दर पर महंगाई भत्ता देने से जुड़ा है। इससे पहले एकल पीठ ने सरकार को लंबित डीए और महंगाई राहत का भुगतान करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि एकल पीठ को इस मामले में आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था।

फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आदेश का स्वागत करते हुए सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अन्य योजनाओं के लिए धन उपलब्ध है, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनरों का वैध बकाया लंबे समय से रोका गया था।

विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने भी फैसले का स्वागत किया और कहा कि इस मुद्दे को पंजाब विधानसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने सरकार से अदालत के आदेश का पालन करते हुए बकाया राशि जल्द जारी करने की मांग की।

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि पंजाब सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ खड़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान अदालत के निर्देशों के अनुरूप भुगतान का समाधान निकालेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

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