गांधीनगर में हजारों दीपों से साकार हुआ वीणावादिनी मां सरस्वती का दिव्य स्वरूप

WhatsApp Channel Join Now
गांधीनगर में हजारों दीपों से साकार हुआ वीणावादिनी मां सरस्वती का दिव्य स्वरूप


गांधीनगर,20 अक्टूबर (हि.स.) । गांधीनगर कल्चरल फोरम के गरबा महोत्सव में दुर्गाष्टमी के अवसर पर तीन दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुरूप सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया । इस अवसर पर हजारों गरबा साधकों और श्रद्धालुओं ने हाथों में प्रज्वलित दीपक लेकर एक साथ मां जगदंबा की आरती उतारी। गांधीनगर कल्चरल फोरम के गरबा महोत्सव की विशिष्ट पहचान बन चुकी इस महाआरती में प्रतिभागियों ने एक सुनियोजित संरचना (फॉर्मेशन) में खड़े होकर हजारों दीपों के प्रकाश से वीणावादिनी मां सरस्वती का अलौकिक स्वरूप साकार किया।

विद्या, ज्ञान, कला, साहित्य और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के दिव्य स्वरूप में ज्ञान का प्रकाश, सृजनात्मक चेतना तथा सुर और ताल का अद्भुत समन्वय प्रतिबिंबित होता है। हाथों में वीणा धारण करने वाली मां सरस्वती जीवन में ज्ञान, विवेक, सामंजस्य और संस्कारों का प्रकाश फैलाती हैं। जब हजारों दीपों के सुव्यवस्थित और सामंजस्यपूर्ण प्रकाश के बीच वीणावादिनी मां सरस्वती का स्वरूप साकार हुआ, तब संपूर्ण गरबा परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से झंकृत हो उठा।

इस अद्भुत और अलौकिक दृश्य को देखकर गांधीनगर कल्चरल फोरम के गरबा महोत्सव में उपस्थित हजारों लोगों ने सामूहिक रूप से ‘अहो!’ के उद्गार के साथ इस दिव्य अनुभूति का स्वागत किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो साक्षात् वीणावादिनी मां सरस्वती ने गरबा परिसर में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए हों। इस भावविभोर कर देने वाली अनुभूति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

तीन दशकों से निरंतर निभाई जा रही इस पारंपरिक महाआरती ने एक बार फिर गांधीनगर कल्चरल फोरम के गरबा महोत्सव में भक्ति, लोकसंस्कृति और सामूहिक श्रद्धा के अद्वितीय संगम को उजागर किया।

हिन्दुस्थान समाचार / हर्ष शाह

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

763928 Articles

Share this story