गोरखपुर में कचरे के पहाड़ की जगह बना राप्ती ईको पार्क, 40 एकड़ भूमि का हुआ पुनरुद्धार

WhatsApp Channel Join Now
गोरखपुर में कचरे के पहाड़ की जगह बना राप्ती ईको पार्क, 40 एकड़ भूमि का हुआ पुनरुद्धार


नई दिल्ली, 03 अगस्त (हि.स.)। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में वर्षों पुराने लेगेसी वेस्ट डंपसाइट का वैज्ञानिक निस्तारण कर उसे 40 एकड़ में फैले 'राप्ती ईको पार्क' के रूप में विकसित किया गया है। बायोमाइनिंग तकनीक के जरिए कचरे के पहाड़ को हरित सार्वजनिक स्थल में बदलने से पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनरुद्धार और स्थानीय लोगों को बेहतर जीवन गुणवत्ता का लाभ मिला है।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने बताया कि यह डंपसाइट करीब सात वर्षों तक शहर के कचरे का प्रमुख निस्तारण स्थल रही, जहां लाखों टन कचरा जमा होने से आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध, धुआं, लीचेट का रिसाव, मच्छरों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं गंभीर हो गई थीं। बारिश के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता था तथा भूजल, मिट्टी और वायु प्रदूषण की आशंका भी लगातार बनी रहती थी।

नगर निगम ने इस समस्या के समाधान के लिए बायोमाइनिंग तकनीक अपनाई। आठ ट्रॉमल मशीनों, जेसीबी मशीनों और लगभग 25 कर्मियों की मदद से प्रतिदिन करीब 400 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया गया। कचरे को रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ), ब्लैक सॉइल, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री और इनर्ट सामग्री में अलग किया गया। ब्लैक सॉइल का उपयोग निम्न क्षेत्रों की भराई में किया गया, जबकि आरडीएफ को अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र में प्रसंस्करण के लिए भेजा गया। इससे लैंडफिल पर निर्भरता कम करने के साथ कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हुआ।

परियोजना के तहत 40 एकड़ भूमि को पुनः उपयोग के लिए तैयार किया गया। इससे लेगेसी वेस्ट से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में कमी आई और क्षेत्र की जल तथा वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ। भूमि पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया, जिससे हरित क्षेत्र विकसित हुआ और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिला। अब यहां विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के साथ मधुमक्खियों और तितलियों की संख्या में भी वृद्धि देखी जा रही है।

डंपसाइट के निस्तारण के बाद उसी भूमि पर 'कचरे से कंचन राप्ती ईको पार्क' विकसित किया गया। पार्क में ग्रीन लॉन, वॉकिंग और जॉगिंग ट्रैक, बच्चों के लिए किड्स जोन, ओपन जिम, योग एवं मेडिटेशन क्षेत्र, सेल्फी प्वाइंट, जल संरक्षण संरचनाएं, सोलर लाइटिंग, थीम आधारित उद्यान, आधुनिक बैठने की व्यवस्था, फूड कोर्ट, कियोस्क, पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। पार्क में स्थापित कई कलात्मक संरचनाएं नगर निगम की कार्यशाला से निकले अपशिष्ट पदार्थों से तैयार की गई हैं, जो अपशिष्ट से संसाधन बनाने का संदेश देती हैं।

पार्क में संचालित रेस्टोरेंट का संचालन महिला स्वयं सहायता समूह 'शक्ति की रसोई' के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर भी मिले हैं।

वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 500 लोग सुबह और शाम इस पार्क में सैर, व्यायाम और मनोरंजन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में स्वच्छ वातावरण बनने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है और जीवन स्तर में सुधार हुआ है। बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, वरिष्ठ नागरिकों के लिए शांत वातावरण और परिवारों के लिए मनोरंजन की सुविधाओं ने इसे लोकप्रिय सार्वजनिक स्थल बना दिया है।

-------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

Share this story