पूर्व का उदय जरूरी, भारत के अगले विकास चरण के लिए बंगाल का विकसित होना आवश्यक : गौतम अडाणी

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पूर्व का उदय जरूरी, भारत के अगले विकास चरण के लिए बंगाल का विकसित होना आवश्यक : गौतम अडाणी


कोलकाता, 24 सितंबर (हि.स.)। अडाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अडाणी ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम बंगाल को देश के अगले विकास चरण के लिए एक प्रमुख इंजन के रूप में उभरना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की रणनीतिक स्थिति इसे 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए अनिवार्य बनाती है।

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अडाणी ने कहा कि पिछले कई दशकों में भारत की आर्थिक वृद्धि की गति मुख्य रूप से देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों से आई है, लेकिन विकास के अगले चरण में गुरुत्वाकर्षण के नए केंद्र बनने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, भारत के अगले ट्रिलियन डॉलर के विकास के लिए पूर्व का उदय होना ही चाहिए। यहीं पर 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए बंगाल आवश्यक हो जाता है।

राज्य के भौगोलिक लाभ पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल के पश्चिम में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के खनिज एवं औद्योगिक बेल्ट मौजूद हैं। वहीं, बंगाल की खाड़ी के माध्यम से तेजी से बढ़ते दक्षिण-पूर्व एशियाई और इंडो-पैसिफिक बाजारों तक इसकी सीधी पहुंच है। उन्होंने दावा किया कि फायदों का ऐसा शानदार संयोजन देश में किसी अन्य स्थान के पास नहीं है।

अडाणी ने ऐलान किया कि उनका समूह अगले एक दशक के दौरान बंगाल में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगा। यह महा-निवेश बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण, सड़कों, पुलों, रोपवे, हरित सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा केंद्रों के निर्माण में किया जाएगा।

उन्होंने बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मानवीय विकास पर जोर देते हुए कहा कि विकास को केवल कार्गो वॉल्यूम, मेगावाट या टेराबाइट में नहीं मापा जा सकता, इसका सच्चा पैमाना गहराई से मानवीय होना चाहिए।

इसी क्रम में उन्होंने न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाले 'अडानी आरोग्य मंदिर' का जिक्र किया, जिसके आधे बिस्तर उन लोगों के लिए आरक्षित रहेंगे जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का खर्च नहीं उठा सकते। इसके अतिरिक्त उन्होंने हुगली नदी के किनारे कुमारटोली घाट के जीर्णोद्धार, बंगाल के कलाकारों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए एक विशेष दुर्गा पूजा कार्यक्रम और ऐतिहासिक 'राइटर्स बिल्डिंग' के संरक्षण का भी वादा किया।

गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के साथ अपने तीन दशक पुराने जुड़ाव को याद करते हुए उद्योगपति ने भावुक शब्दों में कहा, पश्चिम में मुंद्रा मेरी पहली कर्मभूमि थी। आज, उसी विनम्रता और जिम्मेदारी की भावना के साथ, मेरी प्रार्थना है कि पूर्व में बंगाल मेरी दूसरी कर्मभूमि बने। उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल को अब अपने भौगोलिक लाभ, बौद्धिक क्षमता और महान औद्योगिक विरासत का पूरा फायदा उठाना चाहिए।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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