मेघालय के गारो हिल्स में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कार्रवाई की मांग

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मेघालय के गारो हिल्स में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कार्रवाई की मांग


नई दिल्ली, 22 मार्च (हि.स.)। मेघालय के गारो हिल्स क्षेत्र में कथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा आदिवासी समुदायों पर अत्याचार के विरोध में रविवार को मेघालय के गारो समुदाय से जुड़े सामाजिक-संगठनात्मक मंच नंग्रिमिंगिन आचिक डोल (एनएडी) ने राजधानी में प्रदर्शन किया। इसमें विभिन्न संगठनों और समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया।

यहां जंतर-मंतर पर आयोजित धरने में प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अवैध घुसपैठियों द्वारा गारो हिल्स में स्थानीय आदिवासी लोगों की जमीन और संसाधनों पर अतिक्रमण किया जा रहा है। साथ ही क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैलाने और भय का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

धरने के दौरान प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर लेकर बैठे रहे, जिनके माध्यम से न्यायालय के आदेशों के पालन, अवैध घुसपैठियों को हटाने, आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा और क्षेत्र में अपराध पर रोक लगाने की मांग उठाई गई।

धरने में शामिल महिला वक्ता जेनी निंगरिंग एन संगमा (डिमडैम संगठन) ने कहा, आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी गंभीर चिंता है और सरकार को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए।

तेंग्राक आर मराक (निक्सामसोआ गारो संगठन) ने कहा, गारो हिल्स में अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कानून लागू करना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।

मेघालय के निवासी रिचर्ड संगमा ने कहा, अवैध घुसपैठ की वजह से गारो हिल्स में स्थानीय लोगों की जमीन और पहचान पर खतरा बढ़ रहा है और सरकार को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के लोग भी इस मुद्दे पर एकजुट हैं और सरकार से घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

वहीं, विलियम मराक ने कहा, अगर समय रहते अवैध घुसपैठ और उससे जुड़े अपराधों पर रोक नहीं लगी तो क्षेत्र में सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है।

धरने के दौरान संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग घुसपैठ के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से अवैध घुसपैठ की जांच, निष्कासन अभियान, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और छठी अनुसूची के तहत आदिवासी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा, कुछ मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराने, अवैध खनन पर रोक लगाने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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