सीएसआईआर ने पांच भारतीय भाषाओं में विज्ञान पत्रिकाओं का किया शुभारंभ

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सीएसआईआर ने पांच भारतीय भाषाओं में विज्ञान पत्रिकाओं का किया शुभारंभ


नई दिल्ली, 26 सितंबर (हि.स.)। वैज्ञानिक जानकारी को देश के अधिक से अधिक लोगों तक उनकी अपनी भाषाओं में पहुंचाने की दिशा में सीएसआईआर ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस पर पांच भारतीय भाषाओं में नई लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं का शुभारंभ किया।

सीएसआईआर के राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-निस्पर) की ओर से शुरू की गई ये पत्रिकाएं तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली और असमिया भाषाओं में प्रकाशित होंगी। इनमें असमिया की ‘विज्ञान लहर’, बंगाली की ‘विज्ञान वृत्तांत’, मराठी की ‘विज्ञान क्षितिज’, तमिल की ‘अरिवियाल अरिक्कैयालर’ और तेलुगु की ‘विज्ञान वेलुगु’ शामिल हैं।

यह पहल सीएसआईआर-निस्पर की लंबे समय से चली आ रही विज्ञान संचार की परंपरा का विस्तार है। संस्थान की प्रमुख पत्रिकाओं में अंग्रेजी की ‘साइंस रिपोर्टर’, हिंदी की ‘विज्ञान प्रगति’ और उर्दू की ‘साइंस की दुनिया’ शामिल हैं।

इन पत्रिकाओं की खासियत यह है कि इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सीएसआईआर-निस्पर की मौजूदा विज्ञान पत्रिकाओं की चुनिंदा सामग्री का एआई की मदद से विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। इसके बाद मानव विशेषज्ञ इसकी समीक्षा, प्रूफरीडिंग, तथ्य-जांच और संपादन करेंगे, ताकि वैज्ञानिक तथ्यों की सटीकता और भाषा की गुणवत्ता बनी रहे।

पत्रिकाओं में अनूदित सामग्री के साथ-साथ संबंधित भारतीय भाषाओं में मौलिक लेख भी प्रकाशित होंगे। इससे क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान लेखन को बढ़ावा मिलेगा और अलग-अलग क्षेत्रों की वैज्ञानिक उपलब्धियों, नवाचारों और तकनीकी विकास को भी लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी और सीएसआईआर-निस्पर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम समेत विभिन्न पत्रिकाओं के संपादक और संपादकीय टीम मौजूद रहे।

सीएसआईआर-निस्पर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने बताया कि पांच भाषाओं में नई पत्रिकाओं की शुरुआत का उद्देश्य विज्ञान को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना और बहुभाषी, समावेशी तथा वैज्ञानिक रूप से जागरूक भारत के निर्माण में योगदान देना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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