भाषा पर पकड़ बनाने के लिए एकाग्रता, लगन और निरंतर अनुशासन जरूरी: रामबहादुर राय

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भाषा पर पकड़ बनाने के लिए एकाग्रता, लगन और निरंतर अनुशासन जरूरी: रामबहादुर राय


भाषा पर पकड़ बनाने के लिए एकाग्रता, लगन और निरंतर अनुशासन जरूरी: रामबहादुर राय


नई दिल्ली, 26 जुलाई (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने रविवार को कहा कि भाषा पर पकड़ बनाने के लिए एकाग्रता, लगन और निरंतर अनुशासन जरूरी है।

रामबहादुर राय ने आज दिल्ली स्थित हिंदी भवन में दिवंगत प्रभात झा की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी और दो पुस्तकों के लोकार्पण अवसर पर यह बात कही। प्रभात झा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राज्यसभा सांसद एवं 'कमल संदेश' के पूर्व संपादक थे।

प्रभात झा की हस्तलिपि और भाषाई पकड़ की सराहना करते हुए रामबहादुर राय ने कहा, हिंदी और मैथिली पर उनका अद्भुत अधिकार था। भाषा सीखने के लिए जो आत्मिक अनुशासन और एकाग्रता चाहिए, वह प्रभात के जीवन में स्पष्ट झलकती थी।

उन्होंने कहा कि प्रभात झा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने पत्रकारिता के सत्य और राजनीतिक दल के अनुशासन के बीच उत्कृष्ट संतुलन बनाए रखा। वह संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित रहने के साथ-साथ हमेशा स्वावलंबी रहे और अपने परिश्रम से परिवार का पालन-पोषण करते रहे।

इस दौरान उन्होंने आयोजकों को सुझाव दिया कि दिवंगत प्रभात झा की स्मृति में हर साल स्मारक व्याख्यानमाला का आयोजन और उनसे जुड़ी सामग्रियां तथा संग्रह एकत्रित कर अगली पुण्यतिथि पर भव्य प्रदर्शनी आयोजित की जानी चाहिए। उनकी निरंतरता को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

प्रभात झा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी ने कहा कि प्रभात झा एक सजग पत्रकार, संवेदनशील लेखक, कुशल संगठनकर्ता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले कर्मयोगी थे। उनकी लेखनी में राष्ट्र का आत्मविश्वास और वाणी में भारत की सांस्कृतिक चेतना का स्पंदन स्पष्ट दिखाई देता था। प्रकाशित पुस्तक (प्रभात झा) केवल एक जीवनी नहीं बल्कि सार्वजनिक जीवन में मूल्यों और समर्पण का प्रेरक दस्तावेज है।

'कमल संदेश' के संपादक डॉ. शिवशक्ति नाथ बख्शी ने कहा कि दिवंगत प्रभात झा ने कभी पद या प्रचार की आकांक्षा नहीं की बल्कि अपने काम और समर्पण से संगठन में एक अमिट स्थान बनाया। भाजपा और संघ से जुड़े संगठनों में उनका योगदान एक मिसाल है।

जिन दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया उनमें पहली पुस्तक 'प्रभात झा: व्यक्तित्व एवं कृतित्व' है और दूसरी पुस्तक 'नव भारत का न्याय दर्शन' है। इसके लेखक सुमित मिश्र हैं। इस बीच प्रभात झा पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गयी। इसमें उनके जीवन, पत्रकारिता और सामाजिक-राजनीतिक योगदान को दिखाया गया।

इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने भी प्रभात झा के साथ बिताये गए अवसरों को याद किया। इस मौके पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में 'पाञ्चजन्य' के संपादक हितेश शंकर और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी डॉ. संजय मयूख और प्रभात झा के परिवार के सदस्य सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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