भारत की पहली इंजीनियरिंग बायोलॉजी स्नातक डिग्री शुरू होगी, 2035 तक बायोइकोनॉमी महाशक्ति बनने का लक्ष्य

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भारत की पहली इंजीनियरिंग बायोलॉजी स्नातक डिग्री शुरू होगी, 2035 तक बायोइकोनॉमी महाशक्ति बनने का लक्ष्य


नई दिल्ली, 16 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत में पहली बार इंजीनियरिंग बायोलॉजी की स्नातक डिग्री शुरू करने की घोषणा की है। गुरुवार को नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में “2035 तक भारत को अग्रणी बायोइकोनॉमी शक्ति बनाने” के रोडमैप के लॉन्च के दौरान ने डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग बायोलॉजी भविष्य में वही भूमिका निभाएगी जो डिजिटल क्रांति में कंप्यूटर साइंस ने निभाई थी। इस नए पाठ्यक्रम के जरिए ऐसे विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे जो इंजीनियरिंग, जीवविज्ञान, चिकित्सा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के संगम पर काम कर सकें।

उन्होंने बताया कि कई आईआईटी मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर इस विषय में अंतरविषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) कार्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत का स्वदेशी और आत्मनिर्भर जैव-प्रौद्योगिकी (बायोटेक) इकोसिस्टम तैयार करना है। उन्होंने बताया कि देश की बायोइकोनॉमी 2014 में लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर आज करीब 95 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि भारत में 11,000 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जो इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ती नवाचार क्षमता का प्रमाण हैं।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य में सिंथेटिक बायोलॉजी, एआई आधारित जैव अनुसंधान, बायो-मैन्युफैक्चरिंग, जीन थेरेपी और सीएआर-टी सेल थेरेपी जैसी तकनीकें स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा और उद्योग में बड़ा बदलाव लाएंगी। उन्होंने उद्योग, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी 15–18 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है। देश में लगभग 100 बायो-इन्क्यूबेटर और 10,000 से अधिक बायोटेक कंपनियां कार्यरत हैं।

वहीं, नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2035 तक भारत की बायोइकोनॉमी को लगभग 700 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसके लिए 50,000 करोड़ रुपये के बायोइकोनॉमी ग्रोथ फंड का प्रस्ताव भी रखा गया है।

सरकार का मानना है कि इन पहलों से भारत में उच्च कौशल वाले लाखों रोजगार सृजित होंगे और देश वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी एवं बायो-मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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