बोत्स्वाना से शनिवार को कूनो पहुंचेंगे 8 चीते, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे रिलीज
- मध्य प्रदेश की धरती पर नवागत चीतों का होगा स्वागत
भोपाल, 27 फरवरी (हि.स.)। बोत्सवाना से आठ चीतों की खेप शनिवार, 28 फरवरी को मध्य प्रदेश आएगी। केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बाड़े में रिलीज करेंगे। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या 39 से बढ़कर 47 हो जाएगी। इसे लेकर कूनो में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने शुक्रवार को बताया कि श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था पहुंचने वाला है। बोत्स्वाना से एयरलिफ्ट किए गए आठ चीते (6 मादा और 2 नर) विशेष विमान से मध्य प्रदेश लाए जा रहे हैं। कूनो एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। अफ्रीका की धरती से आए फर्राटेदार धावक अब कूनों के जंगलों में वन पारिस्थितिकी को समृद्ध करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केन्द्रीय मंत्री सुबह 7.30 बजे नई दिल्ली से विशेष विमान से रवाना होकर प्रातः 8.30 बजे ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट पहुंचेगे। यहां से 8.50 बजे ग्वालियर से हेलिकॉप्टर की मदद से कूनो नेशनल पार्क के लिए प्रस्थान करेंगे। प्रातः 9.20 बजे कूनो स्थित हेलिपेड पहुंचेंगे। यहां बोत्सवाना से लाए जा रहे चीतों को कूनो पार्क मे छोड़ेंगे। इसके बाद वन मंत्री सुबह 10 बजे ग्वालियर के लिए प्रस्थान करेंगे।
ट्रांसलोकेशन की विस्तृत कार्ययोजना
बोत्स्वाना से चीतों की सुरक्षित अनलोडिंग इमिग्रेशन, कस्टम, पशु-चिकित्सा एवं सुरक्षा औपचारिकताएं पूर्ण किए जाने के बाद 28 फरवरी को सुबह 8:30 बजे ग्वालियर से भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों से चीतों को कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना किया जाएगा। चीते प्रातः 9:30 बजे कूनो नेशनल पार्क पहुंचेंगे। उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में पांच हेलीपैड बनाये गये हैं। पूरा अभियान अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत संपन्न किया जाएगा। पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे।
‘प्रोजेक्ट चीता’ अब अपने प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर स्थायी स्थापना और सफल प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुका है। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 वर्तमान में कूनो में पूर्णतः स्थापित और स्वस्थ हैं। इनमें से तीन चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्मे 10 शावक जीवित और स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ‘मुखी’ ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो इस परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। ‘गामिनी’ दूसरी बार माँ बनी है। उसकी पहली गर्भावस्था से जन्में 3 सब-एडल्ट शावक स्वस्थ हैं और हाल ही में उसने तीन नए शावकों को जन्म दिया है। ‘वीरा’ अपने 13 माह के शावक के साथ खुले जंगल में विचरण कर रही है, जबकि ‘निर्वा’ अपने 10 माह के तीन शावकों के साथ संरक्षित बाड़े में है।
एशिया से लुप्त हो चुके चीतों का मात्र तीन वर्षों में सफल पुनर्स्थापन भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक सशक्त उदाहरण बन चुका है। प्रजनन करती मादा चीतों, स्वस्थ दूसरी पीढ़ी के शावकों और नए आवासों में विस्तार के साथ यह स्पष्ट है कि चीता अब भारत की वन पारिस्थितिकी का पुनः अभिन्न अंग बन गया है। वर्तमान में भारत में 39 चीते हैं। इनमें 36 कूनो नेशनल पार्क में और तीन गांधी सागर अभयारण्य में हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

