आईआईटी कानपुर में छात्र आत्महत्या मामलों की जांच के लिए शिक्षा मंत्रालय ने बनाई तीन सदस्यीय समिति

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नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में हाल के छात्र आत्महत्या मामलों की जांच और समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम–नेटफ) के चेयरपर्सन प्रोफेसर अनिल डी. सहस्रबुद्धे करेंगे।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आदेश के अनुसार, यह समिति आईआईटी कानपुर में जुलाई 2023 में जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों के भावनात्मक एवं मानसिक कल्याण के लिए रूपरेखा दिशा-निर्देश के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा भी करेगी। इसके साथ ही संस्थान में छात्रों के लिए उपलब्ध परामर्श सेवाओं, शिकायत निवारण तंत्र तथा अन्य सहयोगी प्रणालियों की उपलब्धता, पर्याप्तता और प्रभावशीलता का आकलन किया जाएगा।

तीन सदस्यीय समिति में प्रोफेसर अनिल डी. सहस्रबुद्धे (चेयरपर्सन, नेटफ) के अलावा मूलचंद अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेन्द्र नागपाल तथा शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

समिति के कार्यक्षेत्र के तहत आईआईटी कानपुर में छात्र आत्महत्या के मामलों की परिस्थितियों की समीक्षा, संस्थागत नीतियों और प्रक्रियाओं का परीक्षण, मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े ढांचे में मौजूद खामियों की पहचान तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए शिक्षा मंत्रालय को सुझाव देना शामिल है। समिति आवश्यकता पड़ने पर आईआईटी कानपुर के हितधारकों से संवाद कर सकती है और संबंधित अभिलेख भी मांग सकती है।

आदेश में कहा गया है कि समिति अपनी रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगी। मंत्रालय ने दोहराया है कि छात्रों के मानसिक और भावनात्मक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और उच्च शिक्षा संस्थानों में सुरक्षित, संवेदनशील और सहयोगी वातावरण सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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