ईडी ने की 242 करोड़ रुपये के सहकारी बैंक घोटाले में छापेमारी

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ईडी ने की 242 करोड़ रुपये के सहकारी बैंक घोटाले में छापेमारी


नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में 242 करोड़ रुपये के कथित सहकारी बैंक घोटाले और धनशोधन मामले में नौ स्थानों पर छापेमारी की है। जांच के दौरान बैंक अधिकारियों, ऋण लाभार्थियों और अन्य संबंधित लोगों के बीच बड़े स्तर की मिलीभगत के संकेत मिले हैं। साथ ही बड़ी संख्या में संपत्ति संबंधी दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक अभिलेख भी जब्त किए गए हैं।

ईडी की मुंबई क्षेत्रीय इकाई-द्वितीय के अनुसार, जांच बाबाजी डेट महिला सहकारी बैंक लिमिटेड, यवतमाल से जुड़े धोखाधड़ी मामले में की जा रही है। यह बैंक महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 के तहत पंजीकृत था। भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2022 में बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था।

मामले की शुरुआत बैंक जमाकर्ताओं के धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी अनेक शिकायतों के बाद हुई। इसके बाद राज्य सरकार ने विशेष लेखा परीक्षण (स्पेशल ऑडिट) कराया। जांच में पाया गया कि बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अध्यक्ष, निदेशक मंडल के सदस्य और अन्य अधिकारी कर्जदारों, मूल्यांकनकर्ताओं तथा लेखा परीक्षकों के साथ कथित मिलीभगत कर रहे थे।

जांच में सामने आया कि बिना पर्याप्त गारंटी और ऋण चुकाने की वास्तविक क्षमता का आकलन किए बिना बड़े पैमाने पर ऋण वितरित किए गए। बाद में इन ऋणों की राशि को बैंक की नीतियों और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के विपरीत अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया।

विशेष लेखा परीक्षण में पाया गया कि बैंक अधिकारियों और ऋण लाभार्थियों की मिलीभगत से लगभग 242 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में कानून प्रवर्तन एजेंसी पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

ईडी की छापेमारी में सामने आया कि कई कर्जदारों ने ऋण के रूप में प्राप्त धनराशि का व्यक्तिगत उपयोग किया, बड़ी मात्रा में नकद निकासी की और पुराने कर्ज को नए कर्ज के जरिए नियमित दिखाने की कोशिश की। जांच एजेंसी के अनुसार कुछ मामलों में राशि बैंक अधिकारियों के खातों तक कथित कमीशन या रिश्वत के रूप में भी पहुंची।

जांच में यह भी पाया गया कि बैंक अधिकारियों ने कुछ मौजूदा उधारकर्ताओं की पहचान और दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी ऋण खाते खोले। गिरवी रखी गई संपत्तियों का मूल्यांकन भी कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और उसके आधार पर प्राप्त ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया।

ईडी ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान बड़ी संख्या में संपत्ति संबंधी दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों की जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसी का कहना है कि धन के प्रवाह, लाभार्थियों की पहचान और घोटाले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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