अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटरों पर ईडी की छापेमारी, 220 कर्मचारी मिले

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अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटरों पर ईडी की छापेमारी, 220 कर्मचारी मिले


अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटरों पर ईडी की छापेमारी, 220 कर्मचारी मिले


नई दिल्ली, 16 सितंबर (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पंजाब, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ में चार ठिकानों पर छापेमारी की है। कार्रवाई के दौरान तीन सक्रिय कॉल सेंटरों का पता चला, जहां करीब 220 लोग काम करते मिले।

ईडी की हैदराबाद जोनल इकाई ने बताया कि 15 सितंबर को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में तलाशी ली गई। जांच में सामने आया कि आरोपित पटियाला और पुणे से कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिकी नागरिकों से धोखाधड़ी कर रहे थे।

जांच के अनुसार गिरोह पहले डेटा सप्लायर और कॉल-ब्लास्ट वेंडरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों की जानकारी हासिल करता था। इसके बाद उन्हें बड़ी संख्या में स्पैम ईमेल भेजे जाते थे, जिनमें समस्या के समाधान के नाम पर एक टोल-फ्री नंबर दिया जाता था। जब पीड़ित उस नंबर पर संपर्क करते थे तो कॉल सेंटर के कर्मचारी उनका भरोसा जीतते थे और फिर खुद को प्रतिष्ठित कंपनियों, बैंकों या सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर डर या तात्कालिकता का माहौल बनाते थे।

ईडी के मुताबिक, पीड़ितों को गिफ्ट कार्ड, नकदी, सोना या अन्य माध्यमों से भुगतान करने के लिए राजी किया जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य भुगतान की पूरी प्रक्रिया में उनका मार्गदर्शन करते थे और प्राप्त गिफ्ट कार्ड, नकदी या सोने को अपने कब्जे में ले लेते थे। गिफ्ट कार्ड को बाद में बिटकॉइन या यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था, जबकि सोना और डॉलर स्थानीय बाजारों में बेचकर नकदी जुटाई जाती थी। इसके बाद हवाला ऑपरेटरों, क्रिप्टो कारोबारियों और अन्य माध्यमों से रकम भारत पहुंचाई जाती थी।

तलाशी के दौरान पटियाला में दो और पुणे में एक सक्रिय कॉल सेंटर मिला। वहां मौजूद कर्मचारियों की पहचान, भूमिका और रिपोर्टिंग व्यवस्था की जांच की जा रही है। छापेमारी में 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, अन्य डिजिटल उपकरण, नकदी और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

ईडी ने बताया कि चंडीगढ़ स्थित एक आवासीय परिसर का इस्तेमाल पूरे नेटवर्क के संचालन और नियंत्रण के लिए किया जा रहा था। जांच एजेंसी अब कॉलिंग स्क्रिप्ट, डायलर और वीओआईपी सिस्टम, पीड़ितों का डेटा, भुगतान के माध्यम, शामिल व्यक्तियों की भूमिका और धन के प्रवाह की विस्तृत जांच कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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