डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में दो आरोपित गिरफ्तार, 5 दिनों की हिरासत
नई दिल्ली, 25 अगस्त (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा के चर्चित डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी से हासिल रकम को पहले बैंक खातों के जरिए नकदी में बदला जाता था और इसके बाद अधिकृत मनी चेंजर कंपनियों के माध्यम से विदेशी मुद्रा में परिवर्तित किया जाता था। इस नेटवर्क से जुड़े साइबर खातों के तार 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज 163 एफआईआर और 330 पीड़ित शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं।
ईडी के पणजी जोनल कार्यालय ने फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को 23 अगस्त को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। दोनों को 24 अगस्त को गोवा की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 29 अगस्त तक पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया।
मामले की जांच उत्तरी गोवा साइबर क्राइम पुलिस थाने में दर्ज उस एफआईआर के आधार पर शुरू हुई, जिसमें गोवा की एक महिला को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी का शिकार बनाया गया था। उसे यह विश्वास दिलाया गया कि वह किसी जांच के घेरे में है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखने का दावा करते हुए उसे डराया-धमकाया गया और 21 मई से 2 जून 2025 के बीच उससे 2.60 करोड़ रुपये से अधिक रकम कथित तौर पर ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट’ में स्थानांतरित करा ली गई।
ईडी के अनुसार, ठगी की रकम आरोपितों तक सीमित नहीं रही बल्कि एक संगठित वित्तीय तंत्र में पहुंची। रकम को पहले निष्क्रिय और नए खोले गए बैंक खातों की शुरुआती परत में भेजा गया और कुछ ही समय में 400 से अधिक लाभार्थी खातों में बांट दिया गया। इन खातों के जरिए बैंक ट्रांसफर, नकद निकासी, सेल्फ चेक और पेमेंट गेटवे सहित विभिन्न माध्यमों से रकम को आगे बढ़ाया गया।
जांच में इस धनराशि का संबंध कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़ी कई संस्थाओं के आपस में जुड़े समूह से सामने आया। इन संस्थाओं ने कुल 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग लेनदेन किए हैं। इनमें करीब 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए। खासतौर पर 584.70 करोड़ रुपये 61,448 अलग-अलग लेनदेन के जरिए विभिन्न स्थानों पर स्थित ‘बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीन’ से जमा किए गए।
जांच एजेंसी ने कहा कि नकदी जमा करने का यह पैमाना और तरीका सामान्य कारोबारी गतिविधियों से मेल नहीं खाता। इन संस्थाओं के बैंक खातों का संबंध 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज 330 पीड़ित शिकायतों और 163 एफआईआर से पाया गया है। इन मामलों में कुल 417.49 करोड़ रुपये के नुकसान की शिकायत दर्ज है।
ईडी के अनुसार, 101 शिकायतों में एक ही पीड़ित से ठगी गई रकम उसी ठगी के दौरान समूह की दो या उससे अधिक संस्थाओं के खातों में पहुंची। इससे जांच एजेंसी को आशंका है कि अलग-अलग कारोबार करने वाली कंपनियों के बजाय इन खातों का इस्तेमाल एक साझा धन संग्रह तंत्र के रूप में किया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि रकम के लेनदेन के लिए इस्तेमाल की गई कई कंपनियां बेहद मामूली आर्थिक स्थिति वाले लोगों के नाम पर पंजीकृत थीं। इनमें कर्मचारी, ड्राइवर और एक कमरे के मकान में रहने वाले लोग शामिल थे। दस्तावेजों में इन्हें कंपनियों का निदेशक दिखाया गया, जबकि ईडी के मुताबिक बैंक खातों और कंपनियों के वास्तविक कामकाज का नियंत्रण अन्य लोगों के हाथों में था।
ईडी ने इस मामले में 17 जुलाई को पीएमएलए की धारा 17 के तहत मुंबई और गोवा में 20 परिसरों पर तलाशी ली थी। इसके बाद 21 अगस्त को भी कुछ अन्य परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान 3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए। इसके अलावा 30 करोड़ रुपये से अधिक शेष राशि वाले सिंडिकेट के खातों को फ्रीज किया गया है। डिजिटल उपकरण, लेखा पुस्तकें, दस्तावेज और वैधानिक रजिस्टर भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

