छत्तीसगढ़ पीएससी भर्ती घोटाला मामले में ईडी ने दो लोगों को किया गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ पीएससी भर्ती घोटाला मामले में ईडी ने दो लोगों को किया गिरफ्तार


रायपुर, 01 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभ्यर्थियों को 25 लाख रुपये में पेपर उपलब्ध कराने और भ्रष्टाचार के मामले में आरोपित उत्कर्ष चंद्राकर और और डीएमएफ फंड घोटाले के आरोपित सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है।

ईडी ने मंगलवार को राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री के पीए सहित सात ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी, जिसके बाद इन दोनों आरोपितों को हिरासत में लिया गया। ईडी की टीम ने इन दोनों को अपनी कस्टडी में लेकर आज ही विशेष न्यायालय में पेश किया, जिसके बाद अदालत ने आरोपितों से मनी लॉन्ड्रिंग और पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) से जुड़े मामलों में पूछताछ करने के लिए 5 दिनों की रिमांड मंजूर कर ली है।सतपाल सिंह छाबड़ा को इससे पहले फरवरी 2026 में छत्तीसगढ़ की एसीबी-ईओडब्ल्यू टीम द्वारा भी डीएमएफ मामले में हिरासत में लिया गया था, और अब इसे आज ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत इन्हें गिरफ्तार किया है।

उत्कर्ष चंद्राकर रायपुर के शांति नगर का रहने वाला बताया गया है। घोटाले में नाम सामने आने के बाद से वह फरार चल रहा था। इससे पहले उसकी ओर से उच्च में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया गया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

सीबीआई की जांच में उत्कर्ष के खिलाफ अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने एक अभ्यर्थी से 25 लाख रुपये लिए थे। आरोप है कि इसके बाद उसने करीब 30 से 35 उम्मीदवारों को सीजीपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। चयन के लिए अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 50 से 60 लाख रुपये तक की रकम मांगी गई थी।

मामले की अहम गवाह सुषमा अग्रवाल ने धारा 164 के तहत दिए बयान में उत्कर्ष से जुड़े कई महत्वपूर्ण जानकारी दी हैं। उसके बयान के मुताबिक उत्कर्ष ने उससे 25 लाख रुपये लिए थे। इसके बाद परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को विशेष इंतजाम के साथ अलग-अलग स्थानों पर ठहराया गया। यह घोटाला 2021 और 2020 की परीक्षाओं के दौरान हुआ।

गवाह के बयान के अनुसार, आठ मई 2022 को बुक की गई बस से अभ्यर्थियों को बारनवापारा के एक रिजार्ट ले जाया गया था। यहां कथित रूप से लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर मुख्य परीक्षा की तैयारी कराई गई। प्रारंभिक परीक्षा से एक दिन पहले 12 फरवरी 2022 को उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराने का भी आरोप है।

जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य परीक्षा के दौरान मोबाइल के माध्यम से प्रश्नपत्र मंगवाकर रिजार्ट में ठहरे उम्मीदवारों को प्रश्नों के उत्तर याद करवाए जाते थे। परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक पैलेस, बारनवापारा रिजार्ट और होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में ठहराने की बात भी जांच में सामने आई है।

उल्लेखनीय है कि आज(सोमवार)छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में रायपुर, दुर्ग, और भिलाई सहित कुल 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की । इस छापेमारी की कार्रवाई के तहत प्रमुख रूप से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व पीए केके चंद्राकर के पुरानी भिलाई स्थित आवास ,पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे चेतन बोरघारिया के धमतरी और बलरामपुर स्थित ठिकानों तथा पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के दुर्ग स्थित ठिकाने पर ईडी की टीमों ने सघन जांच की है।

दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में अधिकारियों और संदिग्ध बिचौलियों से जुड़े कुल 2-3 अन्य ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से डिजिटल सबूत और भर्ती से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलों की पड़ताल की जा रही है। रायपुर जोन की ईडी टीम ने सीजीपीएससी भर्ती में पैसों के अवैध लेन-देन (मनी ट्रेल) और घोटाले के मुख्य आरोपित उत्कर्ष चंद्राकर और अन्य संदिग्धों के ठिकानों पर समानांतर रूप से तलाशी अभियान चलाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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