तकनीकी क्षमता से परिभाषित होगी राष्ट्रों की शक्तिः जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि सामूहिक प्रयासों से भारत न केवल विकसित राष्ट्र बनेगा बल्कि वैश्विक प्रगति को भी नई दिशा देगा। आने वाले दशकों में किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसकी तकनीकी क्षमता से परिभाषित होगी।
डॉ. सिंह ने यह बात लॉस एंजिल्स में वर्चुअल माध्यम से आयोजित 'अखिल-आईआईटी पूर्व छात्र सम्मेलन' को संबोधित करते हुए कही। इस वैश्विक सम्मेलन में दुनिया भर के प्रौद्योगिकी नेता, उद्यमी, निवेशक और शोधकर्ता शामिल हुए।
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत को तकनीकी संप्रभुता हासिल करने और वैश्विक स्तर पर अपनी प्रगति को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व करना होगा।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं रहा बल्कि एक वैश्विक नवप्रवर्तक के रूप में उभर रहा है। साल 2047 तक 'विकसित भारत' के विजन को साकार करने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार हमारी नींव हैं। अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार, जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति और डीप-टेक स्टार्टअप्स का उदय भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति के जीवंत प्रमाण हैं।
भारतीय प्रवासियों, विशेष रूप से आईआईटी के पूर्व छात्रों के योगदान की सराहना करते हुए मंत्री ने उन्हें भारत और वैश्विक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि निवेश, मार्गदर्शन और नीतिगत भागीदारी के माध्यम से प्रवासी भारतीय देश के विकास पथ को निरंतर मजबूत कर रहे हैं।
डॉ. सिंह ने उभरते हुए क्षेत्रों जैसे सेमी कंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और क्वांटम प्रौद्योगिकियों को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक लचीलेपन के लिए अनिवार्य बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

