राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराए हैं, जिससे छोटे शहरों के युवा प्रतिस्पर्धा करने में हुए सक्षम : डॉ. जितेंद्र सिंह

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराए हैं, जिससे छोटे शहरों के युवा प्रतिस्पर्धा करने में हुए सक्षम : डॉ. जितेंद्र सिंह


नई दिल्ली, 11 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराए हैं, जिससे डोडा जैसे छोटे शहरों और कस्बों के युवा अब महानगरों के युवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हुए हैं।

शनिवार को

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज डोडा द्वारा आयोजित दो दिवसीय हाइब्रिड सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कही। सम्मेलन का विषय था— “जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन: समावेशन, समानता और पहुंच की चुनौतियां।”

उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों को अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता मिली है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं रह गया है, बल्कि कौशल, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना भी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज रोजगार का अर्थ केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है। वर्तमान समय कौशल, रचनात्मकता, स्टार्टअप और नए विचारों का है। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 ने भारत के युवाओं को नई ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया है।

उन्होंने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज डोडा को इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा आयोजित करने के लिए बधाई दी और कहा कि यह संस्थान क्षेत्र की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पहले दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्र उच्च शिक्षा के लिए डोडा और भदेरवाह जैसे स्थानों तक लंबी दूरी तय करके आते थे, लेकिन अब शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाएं तेजी से बढ़ी हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एनईपी 2020 ने शिक्षा को अधिक लचीला और बहुविषयक बनाया है। अब छात्र अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग विषयों का अध्ययन कर सकते हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और रचनात्मक बनी है।

भारत के बढ़ते स्टार्टअप क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 350 स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या 2.3 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इनमें बड़ी संख्या में स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से सामने आ रहे हैं, जिससे साबित होता है कि नवाचार अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने सीएसआईआर अरोमा मिशन के तहत लैवेंडर क्रांति का उदाहरण देते हुए कहा कि भदेरवाह और डोडा ने दिखाया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी विज्ञान आधारित उद्यमिता सफल हो सकती है। लैवेंडर की खेती ने स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए हैं तथा क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डोडा हिमालयी उत्पादों, सुगंध आधारित उद्योगों और नवाचार के क्षेत्र में एक विशेष केंद्र बन सकता है। उन्होंने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज डोडा को आयुष मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर सरकार और सीएसआईआर के सहयोग से स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों से अपील की कि वे छात्रों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी सरकारी पहलों की जानकारी दें, ताकि युवा अपने ज्ञान और कौशल को रोजगार और उद्यम में बदल सकें।

डिजिटल तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल सुविधाओं ने दूरदराज के क्षेत्रों के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोले हैं। अब छोटे शहरों के युवा भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और करियर के बेहतर अवसर प्राप्त कर रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के समय देश का नेतृत्व करेगी। उन्होंने शिक्षकों और संस्थानों से आग्रह किया कि वे युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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