सूरत में गौमाता को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग तेज, खून से लिखे ज्ञापन के साथ गौभक्तों की विशाल रैली

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सूरत में गौमाता को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग तेज, खून से लिखे ज्ञापन के साथ गौभक्तों की विशाल रैली


सूरत में गौमाता को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग तेज, खून से लिखे ज्ञापन के साथ गौभक्तों की विशाल रैली


सूरत, 27 जुलाई (हि.स.)। गुजरात के सूरत में गौमाता को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने और पूरे देश में गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर गौरक्षकों एवं विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों ने विशाल जनजागरण रैली निकाली। यह रैली वनिता विश्राम ग्राउंड से शुरू होकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची, जहां गौभक्त एक बछड़े के साथ पहुंचे और अपने खून से लिखे ज्ञापन तथा पोस्टर प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

रैली के दौरान गौरक्षक नेताओं ने सरकार और राजनीतिक दलों पर चुनावी वादे निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि चुनाव के समय गौरक्षा और गौमाता के सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन मुद्दों को भुला दिया जाता है। उन्होंने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने और गौरक्षा के लिए और अधिक सख्त कानून बनाने की मांग दोहराई।

भारत साधु समाज के अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर सीतारामदास जी ने कहा कि जिस देश की संस्कृति मजबूत होती है, वही देश हमेशा आगे बढ़ता है और गौमाता सनातन संस्कृति का प्रमुख आधार है। उन्होंने बताया कि सूरत से 21 लाख हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन केंद्र सरकार तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस मांग को स्वीकार नहीं करती है, तो संत समाज और लाखों गौभक्त दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि जैसे छात्रों के आंदोलनों के आगे सरकार को झुकना पड़ा, वैसे ही गौमाता के मुद्दे पर भी सरकार को निर्णय लेना पड़ेगा।

रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। बापा सीताराम महिला मंडल की अध्यक्षा हीरलबेन ने कहा कि देश के कई नेता बचपन में गौमाता का दूध पीकर बड़े हुए और आज उन्हीं गौमाताओं को कचरा खाने तथा प्लास्टिक निगलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि नेताओं में थोड़ी भी संवेदनशीलता है तो गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक आस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि गौमाता के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित नहीं करती, तो गौभक्त भविष्य में मतदान के अधिकार के उपयोग को लेकर भी आंदोलनात्मक निर्णय लेने पर विचार करेंगे।

गौभक्तों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले समय में देशभर में लोकतांत्रिक तरीके से और व्यापक आंदोलन चलाए जाएंगे। सूरत के अलावा भरूच, जामनगर और बनासकांठा सहित राज्य के विभिन्न जिलों में भी प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने और देशभर में गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

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