रचनाओं में मानवता का संदेश जरूरी: नासिरा शर्मा

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रचनाओं में मानवता का संदेश जरूरी: नासिरा शर्मा


नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। वरिष्ठ हिंदी कथाकार नासिरा शर्मा ने रविवार को कहा कि लेखक को सियासत और मानवता के बीच संतुलन बनाकर लिखना चाहिए, जिससे रचनाओं में मानवता के संदेश जरूर बचे रहें। उन्होंने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में आज साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित साहित्यिक कार्यक्रमों में यह बात कही।

नासिरा शर्मा ने कहा, लेखक जिंदगी के नजदीकी मुद्दों को उठाता है। लेखक को सियासत और मानवता की दृष्टि के बीच संतुलन बनाते हुए लिखना पड़ता है।

​हॉल नं.- 2 स्थित ‘लेखक मंच’ पर आयोजित पहले कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ में दो अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखकों ने पाठकों से संवाद किया।

प्रख्यात डोगरी कवि एवं नाटककार मोहन सिंह ने बताया कि लेखन को व्यवसाय समझना गलत है, इसका उपयोग केवल सामाजिक बदलाव के लिए होना चाहिए। उन्होंने अपनी नज्में ‘घेरा‘, ‘श्राप‘, ‘मां के मरने पर‘, ‘पोतियां ऐसी ही होती हैं‘, ‘साथ न छोड़ देना’, ‘पेड़ और आदमी‘ आदि प्रस्तुत कीं।

वहीं, बोडो की प्रख्यात कवयित्री रश्मि चौधरी ने बताया कि उनकी कविताएं नारीवादी होती हैं, जिनमें ग्रामीण महिलाओं के दुख, पीड़ा और दयालुता जैसे विषय होते हैं। उन्होंने अपनी कविता ‘दरबार‘ बोडो में और शेष कविताएं- ‘आंगन‘, ‘अकेली‘, ‘चिड़िया उड़ गई‘ और ‘जीवन‘ हिंदी में प्रस्तुत कीं।

​‘कहानी-पाठ’ कार्यक्रम नासिरा शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें दो कथाकारों ने अपनी कहानियां सुनाईं कि इनमें एक अवधेश श्रीवास्तव और दूसरे ​हरिसुमन बिष्ट हैं।

अवधेश की कहानियों में बच्चों और कुत्ते के पिल्लों के बीच के प्रेम को दर्शाया गया है, जबकि हरिसुमन की कहानी में ‘तुमने कुछ नहीं कहा था‘, जो गंदे नाले की समस्या पर हो रही राजनीति और सही जन प्रतिनिधि के चुनाव की कसमकस पर आधारित है।

​कार्यक्रम के आरंभ में, साहित्य अकादमी में संपादक (हिंदी) अनुपम तिवारी ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र से अभिनंदन किया और श्रोताओं से उनका परिचय कराया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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