ज्ञान-धर्म इतिहास का दृष्टिकोण 'दक्षिण से उत्तर' हो: सुधांशु त्रिवेदी

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ज्ञान-धर्म इतिहास का दृष्टिकोण 'दक्षिण से उत्तर' हो: सुधांशु त्रिवेदी


नई दिल्ली, 03 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने शनिवार को कहा कि देश के लोगों को ज्ञान और धर्म विजय के इतिहास को समझने का दृष्टिकोण 'उत्तर से दक्षिण' की बजाय 'दक्षिण से उत्तर' की ओर मोड़ना चाहिए।

सुधांशु त्रिवेदी ने यह बात दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में चल रहे तीन दिवसीय 'शब्दोत्सव 2026' के दूसरे दिन 'दक्षिणपथ' विषय पर कही।

कार्यक्रम के दूसरे दिन अन्य सत्रों, कवि सम्मेलनों से लेकर पुस्तक लोकार्पण, दक्षिणपथ मुद्दे और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। इसमें बड़ी संख्या में युवाओं की भीड़ जुटी।

प्रवक्ता ने आरोप लगाया, देश में सीखने की लगन के बजाय, उत्तर-दक्षिण, प्रांतों, भाषाओं और जातियों में जानबूझकर 'जलन' पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जो एक गहरे षड्यंत्र का हिस्सा है।

​तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बयान कांग्रेस मतलब मुसलमान, मुसलमान मतलब कांग्रेस का हवाला देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि अब मुकाबला 'मुसलमान और मुस्लिमीन' के बीच है।

​वक्ता ने देश में 'उत्तर-दक्षिण' के नाम पर प्रांत, वर्ग और भाषा के आधार पर विभाजनकारी उपकरण खोजने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि मुस्लिम नेता कभी भी अपनी भाषाई विविधता (जैसे तेलुगु, असमिया, कश्मीरी) पर जोर नहीं देते, बल्कि वे एक ही बात पर खड़े रहते हैं, जो बताता है कि उनकी एकता एक अलग आधार पर है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुस्लिम समाज में तथाकथित निम्न-पिछड़ी जातियों (गद्दी, घोसी, अंसारी) को शेख और सैयद के खिलाफ खड़ा नहीं किया जाता, जबकि हिंदू समाज में उच्च और निम्न वर्ग का संघर्ष जारी है।

इस मौके पर 'आरएसएस 360 डिग्री' पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इसके लेखक रतन शारदा हैं। उन्होंने पैनल चर्चा में बताया कि यह पुस्तक उनके वर्षों के अनुभव और शोध पर आधारित है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दर्शन, संगठन संरचना और कार्यप्रणाली को एक व्यापक और अंदरूनी दृष्टिकोण से सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब केवल सामाजिक सेवा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वैचारिक क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है। संघ ने ऐतिहासिक चुनौतियों का सामना करते हुए खुद को पुनर्स्थापित किया है और वर्तमान में एक नए वैचारिक युग की स्थापना में अपनी भूमिका निभा रहा है।

इसी बीच, 'द पैम्फलेट पंचायत' मंच से फिल्म और एजेंडा विषय पर एक गहन और इंटरैक्टिव सत्र के दौरान लेखक नीरज बधवार ने एक सवाल का जबाव देते हुए कहा कि भारत को अपनी समृद्ध फिल्म उद्योग और सांस्कृतिक विरासत का लाभ उठाने के लिए केवल 'सिंगल विंडो क्लियरेंस' की कागज़ी योजना ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक विकास के बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश और नीतियों को संभालने वाली एक समर्पित सरकारी इकाई पर जोर देना होगा।

उत्सव के अंतिम दिन 'संघ शक्ति कलियुगे' और ‘देश की आंतरिक एवं बाह्म सुरक्षा पर उद्बोधन’ जैसे समसामयिक एवं वैचारिक सत्र आयोजित होंगे। समारोह का समापन सत्र शाम 5:30 बजे साधो बैंड और गायक हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुति के बाद किया जाएगा। 5:15 बजे तक होगा।

​इस मौके पर तीन दिन में 40 से अधिक पुस्तकों का लोकार्पण, ​छह बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम, दो बड़े कवि सम्मेलन, ओपन माइक (युवाओं के लिए), विभिन्न प्रकाशनों के बुक स्टॉल (सुरुचि, प्रभात, गरुण आदि), भोजन के फूड स्टॉल, 100 से अधिक वक्ता और कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र शामिल होंगे।

यह कार्यक्रम सुबह 10:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक चलेगा और प्रवेश निःशुल्क है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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