देश भर के मुतवल्लियों ने वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को सबकी साझा जिम्मेदारी बताया
नई दिल्ली, 24 जुलाई (हि.स.)। ऑल इंडिया मुतवल्लियान कॉन्फ्रेंस में इकठ्ठा हुए देश भर के मुतवल्लियों ने वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को सबकी साझा जिम्मेदारी बताया है। जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वक्फ सम्पत्ति कोई आम सम्पत्ति नहीं है, यह अल्लाह की सम्पत्ति है। वक्फ संपत्तियों को सुरक्षित रखना केवल मुतवल्लियों की नहीं, बल्कि सबकी जिम्मेदारी है।
जमीअत उलमा-ए-हिंद के तत्वाधान में दिल्ली के माता सुंदरी रोड स्थित ऐवाने ग़ालिब सभागार में ऑल इंडिया मुतवल्लियान कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कांफ्रेंस की अध्यक्षता दरगाह हजरत ख्वाजा बंदानवाज़ गेसुदराज के सज्जादा-नशीन एवं कर्नाटक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद शाह हाफिज मोहम्मद हुसैनी ने की। स्वागत भाषण जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी ने दिया, जबकि संचालन मौलाना मुफ़्ती हस्सान क़ासमी ने किया। इस अवसर पर सांसद इमरान मसूद, मोहिबुल्लाह नदवी, हीरेंद्र मलिक सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम बुद्धिजीवियों, उलमा और वकीलों ने अपने विचार व्यक्त किए।
इसमें मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि वक्फ सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि अल्लाह की अमानत और इस्लामी सभ्यता का मुख्य स्तंभ है, इसलिए इसकी सुरक्षा, दस्तावेजों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर कानूनी संघर्ष भी इबादत है। उन्होंने कहा कि वक्फ को केवल मुतवल्लियों की समस्या नहीं, बल्कि इसे पूरे देश की संयुक्त जिम्मेदारी माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने अपनी अमानतों की रक्षा छोड़ दी, इतिहास ने भी उसकी रक्षा छोड़ दी। मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ के सामने आने वाली समस्याओं में हमारी अपनी लापरवाही, खराब प्रबंधन और दस्तावेजों की गैर-सुरक्षा के साथ बाहरी चुनौतियां भी शामिल हैं। उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के संदर्भ में सरकार से हर स्थिति में न्याय और संवैधानिक सिद्धांतों को प्राथमिकता देने को कहा।
उन्होंने कहा कि मैं सरकार से यह भी कहना चाहता हूं कि न्याय किसी एक वर्ग का पक्ष नहीं लेता, न्याय राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है। कानून का सम्मान तभी रहता है, जब कानून सबके लिए समान हो।
मौलाना मदनी ने मुतवल्लियों से वक्फ संपत्तियों के संपूर्ण रिकॉर्ड को संरक्षित और डिजिटल बनाने, वित्तीय पारदर्शिता, नियमित ऑडिट और अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। मौलाना मदनी ने विरासत से बचने पर जोर दिया और कहा कि इससे संस्थानों के आत्मविश्वास और भावना पर असर पड़ता है। मौलाना मदनी ने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा हालात में वक्फ की सुरक्षा के लिए अंशकालिक नहीं बल्कि पूर्णकालिक संघर्ष की जरूरत है।
पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश इकबाल अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि जहां मुतवल्ली कस्टोडियन होते हैं, वहां वक्फ संपत्ति के निबंधन और कानूनी कार्यवाही में सबसे अधिक दिक्कत होती है, इसलिए मुतवल्ली को विशेष रूप से जिम्मेदारी का अहसास करना होगा।
मरकजी जमीअत अहल-ए-हदीस हिंद के अध्यक्ष मौलाना असगर अली इमाम मेहदी सलफी ने कहा कि वक्फ का पूरा बोझ मुतवल्लियों पर डालने की बजाय पूरे देश और लोगों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास करना चाहिए। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने वक्फ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इसे जनहित के लिए और अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाया जाए।
अपने अध्यक्षीय भाषण में गुलबर्ग दरगाह के सज्जादा-नशीन सैयद शाह मोहम्मद अली हुसैनी साहिब ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान वक्फ संरक्षण आंदोलनों के परिणामस्वरूप लोगों में वक्फ के बारे में महत्वपूर्ण जागरूकता आई है, जिसे और संगठित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्ति की सुरक्षा, अवैध कब्जों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई और वक्फ कानूनों की पूरी जानकारी होना समय की अहम जरूरत है। उन्होंने वक्फ की सुरक्षा के लिए एक प्रभावी समिति गठित करने का सुझाव दिया, जो वक्फ संपत्तियों की निगरानी, सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करे।
साउथ एशियन माइनॉरिटीज़ लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट नासिर अज़ीज़ ने प्रत्येक क्षेत्र में वक्फ संरक्षण समितियां और कानूनी प्रकोष्ठ स्थापित करने, अवैध कब्ज़ों के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई तथा मुतवल्लियों द्वारा पारदर्शी प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था अपनाने पर बल दिया।
सांसद हरेंद्र मलिक ने कुछ स्थानों पर वक्फ संपत्तियों में कुप्रबंधन और अपारदर्शिता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वक्फ की आय का उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए होना चाहिए। उन्होंने वक्फ संरक्षण के इस अभियान में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने जमीअत उलमा-ए-हिंद की सेवाओं की सराहना करते हुए वक्फ संरक्षण के लिए संगठित और साझा प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
सांसद इमरान मसूद ने वक्फ के संबंध में सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा का प्रश्न केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के अन्य धार्मिक स्थलों को भी विभिन्न प्रकार के विवादों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सभी धार्मिक संस्थाओं और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए हिंदुओं और मुसलमानों को मिलकर संघर्ष करना होगा।
दरगाह अजमेर शरीफ के अब्दुल वाहिद हुसैन अंगारा ने कहा कि केवल कानूनों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनजागरूकता, विश्वास और सामूहिक सहयोग ही वक्फ की प्रभावी सुरक्षा की वास्तविक गारंटी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/मोहमद ओवैस
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहम्मद शहजाद

