आईजीएनसीए में पूर्वोत्तर भारत की जीवित सांस्कृतिक विरासत पर दुर्लभ प्रदर्शनी मंगलवार से, दो मोनोग्राफ का लोकार्पण भी

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नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में मंगलवार को पूर्वोत्तर भारत की अद्भुत पारम्परिक शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करने वाली एक दुर्लभ प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।

मंत्रालय के अनुसार इस दौरान दो मोनोग्राफ का भी लोकार्पण होगा। प्रदर्शनी का शीर्षक “लिविंग हेरिटेज इन मेटल, बैम्बू एंड क्ले: ट्रेडिशनल अटेंसिल्स ऑफ नॉर्थ-ईस्ट” होगा। यह आयोजन शोधार्थियों, कलाकारों, डिजाइनरों, संस्कृति-चिंतकों और कला-प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा।

संस्कृति मंत्रालय की महत्वाकांक्षी परियोजना राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन(एनएमसीएम) द्वारा उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनईएचएचडीसी) के सहयोग से आयोजित होगी। यह प्रदर्शनी 2 जुलाई 2026 तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

आज के औद्योगिक और मशीन-प्रधान युग में यह प्रदर्शनी पूर्वोत्तर अंचल की उन जीवित परम्पराओं को रेखांकित करती है, जो धातु, बांस और मिट्टी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से सदियों से लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं। इन पारम्परिक बर्तनों में केवल उपयोगिता ही नहीं, बल्कि समूचे समाज की स्मृतियां, जीवन-पद्धति, प्रकृति-बोध और सांस्कृतिक पहचान समाहित है।

इस खास मौके पर भारतीय पारम्परिक कलाओं और शिल्प पर गहन शोध एवं प्रलेखन को बढ़ावा देने वाले दो महत्त्वपूर्ण मोनोग्राफ : “बेल-मेटल क्राफ्ट ऑफ असम” तथा “चितेरी ऑर्ट ऑफ बुंदेलखंड” का भी लोकार्पण किया जाएगा।

इस अवसर पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, पद्मश्री एवं प्रख्यात समाजसेवी टेकी गुबिन, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव लिली पांडेय, आईजीएनसीए के डीन एवं एनएमसीएम के प्रभारी प्रो. (डॉ.) रमेश चंद्र गौड़ तथा एनएमसीएम के निदेशक डॉ. मयंक शेखर उपस्थित रहेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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