आईएफएफडी रचनात्मकता, तकनीक और विचारों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच : कपिल मिश्रा
नई दिल्ली, 28 मार्च (हि.स.)। दिल्ली के कला, संस्कृति, भाषा, पर्यटन एवम श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने शनिवार को कहा कि आईएफएफडी सिनेमा उत्सव के साथ-साथ रचनात्मकता, तकनीक और विचारों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच है।
मंत्री ने यह बात आज दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव' (आईएफएफडी) में लगी प्रदर्शनी के दौरे के दौरान कही। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव देश-विदेश के फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाकर सिनेमा के भविष्य पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देता है।
इस दौरान पर्यटन मंत्री ने प्रदर्शनी के माध्यम से भारतीय सिनेमा के गौरवशाली इतिहास और उसके आधुनिक स्वरूप का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी को प्रसिद्ध कला-संग्राहक नेविल तुली (टीआरआईएस) ने क्यूरेट किया है, जिसमें 12 अलग-अलग विषय आधारित सेक्शन हैं। प्रदर्शनी में सिनेमा की चुनौतियों, सफलताओं और वैश्विक स्तर पर भारत की 'सॉफ्ट पावर' के प्रभाव को दर्शाया गया है।
कपिल मिश्रा ने कहा कि यह प्रदर्शनी दिल्ली को वैश्विक सिनेमा और सांस्कृतिक शोध के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रदर्शनी सिनेमा, शिक्षा और संस्कृति का संगम है भारत और विश्व सिनेमा के बीच संवाद को भी सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव न केवल सिनेमा का उत्सव है बल्कि देशभर के हुनर को एक मंच प्रदान करने का सशक्त माध्यम भी है।
मंत्री ने बताया कि महोत्सव के दौरान मास्टरक्लासेस, कार्यशाला और स्क्रिप्ट पिचिंग सेशंस का सफल आयोजन हो रहा है। इसमें युवाओं और सिने प्रेमियों को अवसर मिल रहे हैं जो इस महोत्सव की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि दिल्ली अब केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं बल्कि रचनात्मकता और मनोरंजन उद्योग का उभरता हुआ केंद्र भी बन रही है।
कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और प्रसार भारती के सहयोग से राजधानी को एक आधुनिक मीडिया और प्रौद्योगिकी हब के रूप में स्थापित करेगी। इसके लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किये गए हैं।
महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 30 मार्च को आयोजित होने वाली विशेष संध्या में अंतरराष्ट्रीय संगीतकार रिकी केज की लाइव परफॉर्मेंस आकर्षण का केंद्र होगी। इसके साथ ही “नाइट ऑफ ऑनर्स” में इस पहले फिल्म फेस्टिवल की उपलब्धियों को साझा किया जाएगा।
आयोजित सत्रों में संजय राम, अनिल थडानी, जीपी विजयकुमार और गायत्री गुलियानी ने थिएट्रिकल और डिजिटल वितरण के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा किए। विंता नंदा सहित अन्य वक्ताओं ने स्वतंत्र सिनेमा में फंडिंग, वितरण और स्थायित्व जैसे मुद्दों पर चर्चा की। अभिनेता पीयूष मिश्रा ने कहानी, कविता और सिनेमा विषय पर मास्टर क्लास दी।
साथ ही विभिन्न भाषाओं और देशों की फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इनमें गोंधाल (मराठी), इलो इलो (सिंगापुर), रंग दे बसंती (हिंदी), डियर मां (बंगाली), छेल्लो शो (गुजराती), सु फ्रॉम सो (कन्नड़), रोजा (तमिल), 45 (कन्नड़) फिल्मों की स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म निर्माताओं और कलाकारों की उपस्थिति ने दर्शकों के अनुभव को और समृद्ध बनाया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

