दिल्ली सरकार ने आरबीआई के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर

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दिल्ली सरकार ने आरबीआई के साथ एमओयू पर किए हस्ताक्षर


-दिल्ली सरकार के लिए बैंकर, ऋण प्रबंधक और वित्तीय एजेंट के रूप में कार्य करेगा भारतीय रिजर्व बैंक

नई दिल्ली, 05 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली की सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को मूल रूप से सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी सुधार करते हुए दिल्ली सरकार ने सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता अब तक की वित्तीय कार्यप्रणालियों से निर्णायक बदलाव को दर्शाता है और दिल्ली को वित्तीय अनुशासन, संस्थागत मजबूती और इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित आर्थिक विकास के एक नए युग में प्रवेश कराता है।

इस एमओयू के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक दिल्ली सरकार के लिए बैंकर, ऋण प्रबंधक और वित्तीय एजेंट के रूप में कार्य करेगा। इससे राज्य विकास ऋण के माध्यम से मार्केट बॉरोइंग, अतिरिक्त नकदी का स्वचालित निवेश, पेशेवर कैश मैनेजमेंट तथा कम लागत वाली तरलता सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो भारत सरकार और आरबीआई अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप होंगी।

दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में एमओयू पर भारतीय रिजर्व बैंक व दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) बिपुल पाठक ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राजीव वर्मा सहित दिल्ली सरकार व भारतीय रिज़र्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस एमओयू को एक परिवर्तनकारी उपलब्धि और दीर्घकालिक सुधार बताया, जिसे पूर्ववर्ती सरकारें लागू करने में विफल रहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली वर्षों तक संरचित आरबीआई बैंकिंग व्यवस्था और बाजार से पारदर्शी उधारी के लाभ से वंचित रही। पूर्व सरकारों में न तो वित्तीय दूरदृष्टि थी और न ही वैश्विक स्तर की वित्तीय अनुशासनात्मक व्यवस्थाओं को अपनाने की इच्छाशक्ति। आज यह स्थिति निर्णायक रूप से बदल गई है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकारों ने न तो अतिरिक्त सार्वजनिक धन का निवेश किया और न ही किफायती उधारी के विकल्प अपनाए। परिणामस्वरूप अतिरिक्त नकदी बिना निवेश के पड़ी रही, जिससे ब्याज की हानि हुई, जबकि उधारी ऊंची ब्याज दरों पर की गई, जिसका बोझ अंततः जनता पर पड़ा। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्थिरता को शासन का मूल आधार बनाया है। अब दिल्ली सरकार का हर एक रुपया जनता के लिए कार्य करेगा।

एमओयू के अंतर्गत प्रमुख वित्तीय परिवर्तन

अतिरिक्त नकदी का स्वचालित निवेश : अब दिल्ली सरकार के पास उपलब्ध अतिरिक्त नकदी का प्रतिदिन आरबीआई के माध्यम से स्वचालित निवेश किया जाएगा, जिससे ब्याज आय सुनिश्चित होगी और निष्क्रिय निधियों से होने वाली हानि समाप्त होगी।

आरबीआई से कम लागत वाली तरलता सुविधा : दिल्ली सरकार को अब वेज एंड मीन्स एडवांस और स्पेशल ड्राइंग फैसिलिटी के माध्यम से आरबीआई से कम ब्याज पर अल्पकालिक वित्तीय सहायता प्राप्त होगी, जिससे अस्थायी नकदी असंतुलन का कुशल प्रबंधन संभव होगा।

कम ब्याज दर पर बाजार से उधारी : पहली बार दिल्ली सरकार लगभग 7 प्रतिशत की प्रतिस्पर्धी ब्याज दर पर खुले बाजार से उधारी कर सकेगी, जिससे पूर्व में 12 से 13 प्रतिशत की ऊंची दरों पर ली जाने वाली उधारी से मुक्ति मिलेगी।

आरबीआई बैंकिंग प्रणाली से पूर्ण एकीकरण : इस एमओयू के साथ दिल्ली अब अन्य राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के समान आरबीआई की पेशेवर बैंकिंग, कैश मैनेजमेंट और ऋण प्रबंधन सेवाओं का लाभ उठा सकेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह व्यापक वित्तीय सुधार केंद्र सरकार के साथ निरंतर संवाद का परिणाम है और यह दिसंबर 2025 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक के बाद आगे बढ़ा, जिसमें दिल्ली की वित्तीय स्वायत्तता और आधुनिक वित्तीय संरचना पर विस्तृत चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि भारत सरकार की 2 जनवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार, 9 जनवरी 2026 से दिल्ली सरकार के पब्लिक अकाउंट्स को भारत सरकार के पब्लिक अकाउंट्स से पृथक कर दिया गया है, जिससे दिल्ली को पहली बार स्वतंत्र बैंकिंग और उधारी ढांचा प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मार्केट बॉरोइंग से जुटाई गई पूरी राशि का उपयोग केवल पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के लिए किया जाएगा, जिससे टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होगा और भविष्य की पीढ़ियों पर अल्पकालिक दायित्व नहीं डाला जाएगा। उन्होंने बताया कि पूंजीगत निवेश का उच्च मल्टीप्लायर प्रभाव होता है और यह दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में पिछले वर्ष की वास्तविक व्यय राशि की तुलना में लगभग 135 प्रतिशत अधिक पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है।

इन संसाधनों से जिन प्रमुख क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, उनमें यमुना की सफाई और ड्रेनेज अवसंरचना, पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, अस्पतालों और स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार, सार्वजनिक परिवहन और शहरी गतिशीलता औऱ सड़कें, फ्लाईओवर एवं अन्य आवश्यक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कड़े वित्तीय अनुशासन, आरबीआई द्वारा निर्देशित प्रक्रियाओं और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी से दिल्ली की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, रोजगार सृजन होगा और नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एमओयू केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि दशकों तक दिल्ली को लाभ पहुंचाने वाला ऐतिहासिक वित्तीय सुधार है। इसके साथ ही दिल्ली जिम्मेदार शासन, मज़बूत संस्थानों और सतत विकास की नई यात्रा पर अग्रसर हो रही है, जो विकसित भारत के विज़न के अनुरूप है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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