दिल्ली सरकार ने अपना इंजीनियरिंग कैडर बनाने का लिया निर्णय

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दिल्ली सरकार ने अपना इंजीनियरिंग कैडर बनाने का लिया निर्णय


नई दिल्ली, 3 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने विकास से जुड़े निर्माण कार्यों में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए अलग से इंजीनियरिंग कैडर बनाने का निर्णय लिया है। इस बड़े संरचनात्मक सुधार का निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की राजधानी को ‘विकसित दिल्ली’ बनाने के लिए यह निर्णय मील का पत्थर साबित होगा। अब दिल्ली के सतत विकास और ढांचागत परियोजनाओं को गति मिलेगी, जिसका लाभ सीधे तौर पर आमजन को मिलेगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी सरकार का यह निर्णय प्रधानमंत्री नेरन्द्र मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म व ट्रांसफॉर्म’ वाले आदर्श वाक्य से प्रेरित है।

दिल्ली सचिवालय में आयोजित कैबिनेट की इस बैठक में सरकार के सभी मंत्री मौजूद रहे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि अभी तक दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी के पास अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर नहीं था। विभाग की संपूर्ण इंजीनियरिंग सेवाएं केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के कैडर पर ही निर्भर थीं। वर्तमान में पीडब्ल्यूडी, दिल्ली के इंजीनियरिंग विंग में कुल 36 श्रेणियों में 3214 स्वीकृत पद सीपीडब्ल्यूडी कैडर के अंतर्गत आते हैं, जिन पर नियुक्तियां केंद्र सरकार की ओर से की जाती रही हैं। इस व्यवस्था के चलते दिल्ली सरकार के कार्यों की गति पर कई बार असर पड़ता था और विभाग को प्रशासनिक और विकास संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप तुरंत निर्णय लेने में अड़चनों का सामना भी करना पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली सरकार को नया सचिवालय, सभी 11 जिलों में मिनी सचिवालयों के अलावा मंडियों, खेल मैदानों व प्रशासनिक ढांच को और मजबूत करने के लिए कई इमारतों, कार्यालयों आदि का तेजी से निर्माण करना है। यह तभी संभव है, जब हमारा अपना इंजीनियरिंग कैडर हो। इस गंभीर मसले पर पिछले 30 साल से कोई निर्णय नहीं लिया गया, इसीलिए कैबिनेट ने इंजीनियरों का अलग से कैडर बनाने को स्वीकृति दी है। कैबिनेट के इस निर्णय से अब दिल्ली सरकार को अपने स्तर पर इंजीनियरों की भर्ती करने और खाली पदों को भरने की शक्ति प्राप्त होगी। इससे दिल्ली सरकार न केवल इंजीनियरिंग सेवाओं में आत्मनिर्भर बनेगी बल्कि राजधानी के लिए एक विशेषीकृत, स्थानीय अनुभव से संपन्न और दीर्घकाल तक प्रतिबद्ध इंजीनियरिंग व पारदर्शी कार्यबल तैयार किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कैडर की संरचना और कार्यप्रणाली तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। प्रारंभिक चरण में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के इच्छुक अधिकारी इस नवनिर्मित कैडर का हिस्सा बन सकेंगे। यदि आवश्यक संख्या पूरी नहीं होती है, तो समिति की सिफारिश के आधार पर अन्य वैकल्पिक भर्ती सिस्टम अपनाया जाएगा, जिसकी मंजूरी सक्षम प्राधिकारी से ली जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार कैबिनेट का यह निर्णय दिल्ली सरकार को अपनी विकास परियोजनाओं में और अधिक दक्ष, उत्तरदायी और दूरदर्शी बनने का अवसर प्रदान करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

Livevns.news Desk
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