स्वदेशी कौशल और आधुनिक तकनीक ही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक आधारशिला: गडकरी

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स्वदेशी कौशल और आधुनिक तकनीक ही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक आधारशिला: गडकरी


नई दिल्ली, 11 माई (हि.स.)। दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित 'प्रकृति संवाद' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय सड़क, परिवहन एवम राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि स्वदेशी कौशल और आधुनिक तकनीक का संगम ही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक आधारशिला है।

गडकरी ने इस विचार गोष्ठी में 'स्वदेशी, स्वावलंबन और प्रकृति संरक्षण' के महत्व पर जोर दिया। डॉ. गोविंद जी के विचारों और व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते हुए, गडकरी ने भारत को 'ऊर्जा आयात' करने वाले देश के बजाय 'ऊर्जा निर्यात' करने वाला देश बनाने का विजन साझा किया।

मंत्री ने बताया कि भारत वर्तमान में 22 लाख करोड़ रुपए का जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) आयात करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी से बनने वाली ग्रीन हाइड्रोजन भारत की ऊर्जा निर्भरता को समाप्त कर देगी।

गडकरी ने कहा कि आज का किसान केवल अन्न ही नहीं, बल्कि ऊर्जा, डामर (बिटुमेन) और हवाई ईंधन का भी प्रदाता बन रहा है। 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाली 'फ्लेक्स इंजन' गाड़ियां अब हकीकत हैं। उन्होंने बताया कि इथेनॉल 65 रुपए लीटर है, जबकि पेट्रोल 120 रूपए लीटर, जिससे जनता का पैसा बचेगा।

मंत्री ने बताया कि पराली जलाने के बजाय अब उससे बायो-सीएनजी और 'सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल' (हवाई ईंधन) बनाया जा रहा है। पानीपत में इस दिशा में बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है।

'वेस्ट टू वेल्थ' के सिद्धांत पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि गाजीपुर जैसे कूड़े के ढेरों से 80 लाख टन कचरा निकालकर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने घोषणा की कि 2027 तक देश के सॉलिड वेस्ट (ठोस कचरे) की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।

गडकरी ने पारिस्थितिकी और पर्यावरण के संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पेंच टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश/महाराष्ट्र) और अन्य जंगलों में पुलों (अंडरपास) और सुरंगों का निर्माण किया गया है। अब पेड़ों को काटने के बजाय 'ट्रांसप्लांट' करने पर जोर दिया जा रहा है। औरंगाबाद में 100 साल पुराने पेड़ों को सफलतापूर्वक दूसरी जगह रोपित किया गया है।

मंत्री ने बताया कि उनकी रुचि राजनीति से अधिक कृषि और ग्रामीण विकास में है। उन्होंने 'एम्ब्रियो ट्रांसफर' जैसी आधुनिक पशुपालन तकनीक और जैविक खेती के लाभ गिनाए।

उन्होंने बताया कि 'स्मार्ट विलेज' और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए 2,500 करोड़ रुपये का एक मॉडल खड़ा किया है, जिससे 15,000 लोगों को रोजगार मिला है।

गडकरी ने दत्तोपंत ठेंगड़ी जी को उद्धृत करते हुए कहा कि एक राजनेता अगले चुनाव के बारे में सोचता है लेकिन एक सामाजिक-आर्थिक सुधारक सदियों के बारे में सोचता है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी और तकनीक का सही समन्वय ही भारत को जल, जमीन, जंगल और जानवर के संरक्षण के साथ एक समृद्ध राष्ट्र बनाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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