(लीड) दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति का मसौदा जारी, सुझाव के लिए 30 दिन का समय

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(लीड) दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति का मसौदा जारी, सुझाव के लिए 30 दिन का समय


नई दिल्ली, 11 अप्रैल (हि. स.)। दिल्ली सरकार ने शनिवार को नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति मसौदा लोगों और संबंधित पक्षों की राय के लिए सार्वजनिक कर दिया। इस प्रस्तावित नीति पर सुझाव देने के लिए सभी हितधारकों को 30 दिन (10 मई तक) का समय दिया गया है, जिसके बाद पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बयान में कहा कि प्रस्तावित दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति मसौदा 2026 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राजधानी में स्वच्छ, सुलभ और सतत परिवहन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नीति 31 मार्च 2030 तक प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन, कर छूट, अनिवार्य प्रावधान और अवसंरचना विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नीति के अंतर्गत सभी खरीद प्रोत्साहन डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को सीधे दिया जाएगा। इसमें वे व्यक्ति, स्वामित्व फर्म, एजेंसियां और कंपनियां शामिल होंगी जो दिल्ली के निवासी हैं और जिनके वाहन दिल्ली में पंजीकृत हैं। लाभार्थी परिवहन विभाग के तय किए गए सिस्टम के जरिए सीधे सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए एक्स शोरूम कीमत 2.25 लाख रुपये तक तय की गई है। ऐसे वाहनों पर सब्सिडी तीन चरणों में दी जाएगी। पहले साल 10,000 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 30,000 रुपये), दूसरे साल 6,600 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 20,000 रुपये) और तीसरे साल 3,300 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 10,000 रुपये) तक का प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रिक तीन-पहिया (एल5एम श्रेणी) वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पहले साल 50,000 रुपये, दूसरे साल 40,000 रुपये और तीसरे साल 30,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, इलेक्ट्रिक चार पहिया माल वाहनों (एन1 श्रेणी) पर पहले साल एक लाख रुपये, दूसरे साल 75,000 रुपये और तीसरे साल 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक तीन-पहिया (एल5एम श्रेणी) वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पहले साल 50,000 रुपये, दूसरे साल 40,000 रुपये और तीसरे साल 30,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, इलेक्ट्रिक चार पहिया माल वाहनों (एन1 श्रेणी) पर पहले साल एक लाख रुपये, दूसरे साल 75,000 रुपये और तीसरे साल 50,000 रुपये का प्रोत्साहन तय किया गया है।

मुख्यमंत्री बताया कि स्क्रैपिंग प्रोत्साहन के तहत पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने पर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने वालों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इलेक्ट्रिक दोपहिया पर 10,000 रुपये, तीन-पहिया पर 25,000 रुपये, गैर-परिवहन इलेक्ट्रिक कारों पर एक लाख रुपये और चार पहिया माल वाहनों पर 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका लाभ लेने के लिए जरूरी है कि अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर से प्रमाणपत्र मिलने के छह महीने के भीतर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदी जाए। यह सुविधा दिल्ली में रजिस्टर्ड बीएस-IV और उससे पुराने वाहनों पर लागू होगी। इलेक्ट्रिक कारों के मामले में यह लाभ केवल पहले एक लाख पात्र आवेदकों को मिलेगा और कार की एक्स- शोरूम कीमत 30 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में व्यापक छूट प्रदान की जाएगी। नीति अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पंजीकृत सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों को 31 मार्च 2030 तक पूर्ण छूट दी जाएगी, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की इलेक्ट्रिक कारों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।

चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह एजेंसी योजना बनाने, समन्वय करने और काम को लागू करने की जिम्मेदारी संभालेगी। इसके लिए डिजिटल पोर्टल तैयार या जोड़ा जाएगा, जिससे चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग से जुड़े कामों की मंजूरी, निगरानी और संचालन पूरी तरह पारदर्शी और आसान हो सके। इस प्रक्रिया में डीएम, एसडीएम, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय भी सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी, जिसमें सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नीति में भविष्य के लिए कुछ जरूरी नियम भी तय किए गए हैं। एक जनवरी 2027 से दिल्ली में नए रजिस्ट्रेशन के लिए केवल इलेक्ट्रिक तीन-पहिया (एल5) वाहन ही मंजूर होंगे। इसके बाद एक अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही पंजीकरण किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूल बसों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक करना अनिवार्य होगा। इसके तहत दूसरे साल के अंत तक कम से कम 10 प्रतिशत, तीसरे साल तक 20 प्रतिशत और 31 मार्च 2030 तक 30 प्रतिशत बसों को इलेक्ट्रिक करना होगा। यह नियम सभी स्कूल बसों पर लागू होगा, चाहे वे मालिकाना, लीज या किराए पर चल रही हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी बेड़े में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी। नीति अधिसूचना के बाद दिल्ली सरकार के अंतर्गत सभी किराए या लीज पर लिए गए वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे, सिवाय आपातकालीन या विशेष रूप से छूट प्राप्त वाहनों के। इसके अलावा दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और परिवहन विभाग द्वारा शामिल की जाने वाली सभी नई अंतर-राज्यीय बसें भी इलेक्ट्रिक होंगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस नीति को सही तरीके से लागू करने के लिए ईवी फंड बनाया जाएगा। इसमें राज्य का बजट, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं व अनुदान, एयर एम्बियंस फंड, पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क, पीएम ई-ड्राइव योजना, टैक्स और अन्य मंजूर स्रोत शामिल होंगे। साथ ही परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली ईवी एपेक्स समिति बनाई जाएगी, जो इस नीति के लागू होने और फंड के इस्तेमाल की निगरानी करेगी। इस महत्वाकांक्षी नीति के लिए कुल 3,954.25 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें 1,236.25 करोड़ रुपये वाहन खरीद पर प्रोत्साहन, 1,718 करोड़ रुपये स्क्रैपिंग प्रोत्साहन और 1,000 करोड़ रुपये चार्जिंग ढांचे के विकास पर खर्च किए जाएंगे। खर्च को सालों के हिसाब से भी तय किया गया है। पहले साल 965.5 करोड़ रुपये, दूसरे साल 1,012.75 करोड़ रुपये, तीसरे साल 1,231.5 करोड़ रुपये और चौथे साल 744.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह ड्राफ्ट ईवी नीति 2026 दिल्ली को साफ, हरित और आधुनिक परिवहन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएगी। इससे प्रदूषण कम होगा और लोगों को बेहतर व सुलभ परिवहन सुविधाएं मिलेंगी।

दिल्ली के परिवहन विभाग द्वारा जारी दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2026 के मसौदे को आधिकारिक तौर पर विभाग की वेबसाइट https://transport.delhi.gov.in पर आम जनता और सभी हितधारकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। विभाग ने इस पर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इच्छुक लोग अधिसूचना की तारीख से 30 दिनों के भीतर यानी 10 मई तक अपने सुझाव भेज सकते हैं। इसके लिए evpolicy2026@gmail.com पर ई-मेल किया जा सकता है या डाक के जरिए संयुक्त आयुक्त (ईवी), परिवहन विभाग, जीएनसीटीडी, 5/9, अंडर हिल रोड, दिल्ली-110054 के पते पर भी भेजा जा सकता है। विभाग ने साफ किया है कि तय समय सीमा के बाद भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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