केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के 51 सदस्यीय छात्र दल ने रोली-खोली हिमालय पर्वत पर किया ध्वजारोहण समारोह
नई दिल्ली, 31 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी स्थित रोली-खोली हिमालय पर्वत पर रविवार को एक भव्य और ऐतिहासिक संस्कृत ध्वजारोहण समारोह का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के 51 सदस्यीय छात्र-छात्राओं के दल ने पूरे उत्साह के साथ संस्कृत ध्वज फहराया और भाषा के संवर्धन का संकल्प दोहराया।
इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), संस्कृत भारती, तरुणोदय संस्कृत सेवा संस्था (शिवमोग्गा), यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरुणोदय इकाई (शिवमोग्गा) तथा गीर्वाण भारती इकाई (श्री आदिचुंचनगिरि क्षेत्र) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित युवाओं ने संस्कृत प्रचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए एक प्रेरणादायी श्लोक प्रस्तुत किया, “हिमाद्रौ तरुणाः सर्वे संस्कृतध्वजवाहकाः । ज्ञानदीपं नयामोऽद्य भारतस्य नवोदितम् ॥” जिसका अर्थ है कि हिमालय की ऊँचाइयों पर खड़े ये युवा संस्कृत ध्वज के वाहक बनकर, नवभारत के निर्माण के लिए ज्ञान का दिव्य दीप प्रज्वलित कर रहे हैं।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने अपना संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि कुल्लू-मनाली के निकट स्थित रमणीय रोली-खोली पर्वत पर तीसरी बार संस्कृत ध्वजारोहण का सफल आयोजन होना अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। हिमालय के इस दिव्य वातावरण में संस्कृत ध्वज का फहराया जाना भारतीय संस्कृति के गौरव, वैभव और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।
कुलपति ने कार्यक्रम के मुख्य संदेश को रेखांकित करते हुए कहा कि हिमालयस्य शिखरे शिखरे संस्कृतम्, भारतस्य गेहे गेहे संस्कृतम् अर्थात हिमालय की चोटियों से लेकर भारत के प्रत्येक घर तक संस्कृत की वाणी गूँजनी चाहिए।
प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक, तार्किक एवं सुव्यवस्थित भाषाओं में से एक है। भाषाई दक्षता, तार्किक चिंतन और नैतिक मूल्यों के विकास के लिए इसका अध्ययन बाल्यावस्था से ही प्रारंभ होना चाहिए।
विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साहसिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करते हैं। विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
ट्रेकिंग अभियान के समन्वयक डॉ. योगेन्द्र दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कठिन और प्रेरणादायी हिमालयी ट्रेकिंग अभियान में विश्वविद्यालय के देश भर में स्थित 12 परिसरों के 51 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने वालों में जयपुर परिसर के क्रीड़ा सहायक निदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा, संस्कृत भारती एवं तरुणोदय संस्कृत सेवा संस्था के प्रमुख व ट्रेक समन्वयक ए. एन. विजयेन्द्र राव, यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के ट्रेक संयोजक नवीन चंद्र तिवारी, टीम लीडर एम. के. ज्योति तथा रोली-खोली शिविर प्रमुख आदित्य सहित बड़ी संख्या में छात्र और दल के सदस्य उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

