दिल्ली में 'वरदान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव' 26-27 फरवरी को
नई दिल्ली, 23 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली के गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में 26-27 फरवरी को विश्व का पहला 'वरदान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा। दधीचि देहदान समिति एवं संप्रेषण मल्टीमीडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य मानवता की सेवा और अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है।
दधीचि देहदान समिति के संरक्षक एवं विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, “जब हम इस महोत्सव की कल्पना कर रहे थे, तो हमें विश्व में इस विषय पर केंद्रित कोई दूसरा डेटा बैंक या महोत्सव नहीं मिला। यह अपनी तरह का पहला प्रयास है। इस महोत्सव में लघु फिल्म रील और प्रेरणादायक फिल्में शामिल हैं, जो दर्शकों को अंगदान की संवेदनशीलता से रूबरू कराएंगी।”
उन्होंने बताया कि समिति अब तक 500 शरीर और 1250 आंखों का दान संपन्न करा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' में दो बार अंगदान के महत्व पर चर्चा कर इस अभियान को राष्ट्रीय पहचान दी है। इस अभियान में स्वास्थ्य क्षेत्र के 44 एनजीओ, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और स्वास्थ्य मंत्रालय का भी सहयोग मिल रहा है।
समिति के एक प्रमुख सदस्य और महोत्सव के निदेशक अतुल गंगवार ने कहा कि अक्सर फिल्म महोत्सव ग्लैमर और चमक-धमक के लिए जाने जाते हैं, लेकिन वरदान का उद्देश्य समाज के सबसे गंभीर विषय पर जागरूकता लाना है इस उत्सव में स्कूल और कॉलेज के छात्रों, फिल्म संस्थानों और अनुभवी पेशेवरों द्वारा बनाई गई फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। सिनेमा में नैरेटिव बदलने की ताकत है। हमें खुशी है कि हमारे पास 100 से अधिक फिल्में आईं, जिनमें से जूरी ने 67 बेहतरीन फिल्मों (शॉर्ट फिल्म, रील और प्रेरणादायक फिल्में) का चयन किया है।
महोत्सव के अवसर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा मौजूद रहेंगे। वहीं अभिनेता मनोज जोशी और अनंत विजय फिल्म निर्माण तथा सामाजिक सरोकारों पर मास्टर क्लास लेंगे। इसके अलावा अंगदान के क्षेत्र में अतुलनीय कार्य के लिए पद्मश्री नीलेश (सूरत) को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही कवयित्री कीर्ति काले की ओर से देहदान पर रचित एक विशेष गीत का विमोचन भी होगा।
इस महोत्सव का मुख्य केंद्र युवा पीढ़ी है। छात्रों की ओर से बनाई गई रील और लघु फिल्मों के माध्यम से एक विशाल डिजिटल निर्देशिका तैयार की गई है, जो भविष्य में अंगदान के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगी। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म महोत्सव अपनी तरह का दुनिया का पहला ऐसा मंच है जो पूरी तरह से देहदान और अंगदान के विषय पर केंद्रित है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

