बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे हो सकती है : रेखा गुप्ता

WhatsApp Channel Join Now
बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे हो सकती है : रेखा गुप्ता


नई दिल्ली, 19 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को महिला आरक्षण विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक को लेकर लोकसभा में हुए घटनाक्रम पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों में संसद में जो देखने को मिला, वह बेहद अफसोसजनक है और यह देश की महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है। आजादी के 78 वर्षों बाद भी देश की बेटियां अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने उन दलों पर निशाना साधा जो ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देते रहे, लेकिन अब महिलाओं की इस लड़ाई से पीछे हट गए और इसे लोकतंत्र की जीत बता रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे हो सकती है?

दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित दिल्ली भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पिछले 30 वर्षों से बार-बार संसद में आता रहा है, लेकिन हर बार किसी न किसी बहाने से उसे रोका गया। कभी फाड़ा गया, कभी दबाया गया, कभी जलाया गया। इस बार भी विपक्ष ने जानबूझकर विभिन्न तर्क गढ़कर इसे पास नहीं होने दिया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2023 में पारित विधेयक में साफ तौर पर लिखा है कि महिलाओं के लिए आरक्षण डिलिमिटेशन (परिसीमन) के बाद लागू होगा। ऐसे में आज उसी प्रावधान को लेकर विरोध करना विरोधाभासी है। जब 2023 में यही शर्त स्वीकार की गई थी तो आज विरोध किस बात का है?

विपक्ष द्वारा 543 सीटों के भीतर 33 प्रतिशत आरक्षण देने के तर्क पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसा किया जाए तो पहले यह स्पष्ट किया जाए कि कौन से पुरुष जनप्रतिनिधि अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं। केंद्र सरकार का प्रस्ताव एक ‘विन-विन’ समाधान था, जिसमें सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता। साथ ही, किसी भी मौजूदा प्रतिनिधि का नुकसान नहीं होता, राज्यों और क्षेत्रीय दलों का प्रतिनिधित्व भी सुरक्षित रहता। उन्होंने कहा कि 1971 से लोकसभा की सीटें 543 पर स्थिर हैं, जबकि उस समय देश की जनसंख्या लगभग 50 करोड़ थी और आज यह 150 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में सीटों का पुनर्वितरण और वृद्धि समय की मांग है। यह सही अवसर है जब सीटें बढ़ाई जा सकती हैं और महिलाओं को उनका अधिकार दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने ‘कोटे में कोटा’ की मांग पर विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि यह केवल बहानेबाजी है। उन्होंने तीखा तंज करते हुए कहा कि विपक्ष को केवल साधारण अधिकार नहीं, बल्कि हर चीज एक साथ चाहिए, जबकि बुनियादी अधिकार, यानी महिलाओं को संसद और विधानसभा तक पहुंचने का अवसर देने पर भी वे सहमत नहीं हैं। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि जब ट्रिपल तलाक कानून लाया गया या शाहबानो मामले में न्यायालय का निर्णय आया, तब इन्हीं दलों ने उसका विरोध किया था। आज उनका यह रुख केवल दिखावा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विपक्ष से यहां तक कहा कि इसका श्रेय आप ले लीजिए, लेकिन महिलाओं के हित में इस विधेयक को पारित कर दीजिए, फिर भी विपक्ष तैयार नहीं हुआ। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी ‘ऑल इंडिया एंटी रिफॉर्म कांग्रेस’ बन चुकी है, जिसने हर बड़े सुधार जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, डिजिटल पेमेंट, जीएसटी, आर्टिकल 370, ट्रिपल तलाक, यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी), सीएए और वन नेशन-वन इलेक्शन जैसे मुद्दों का विरोध किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए व्यापक कार्य हुए हैं। इनमें 10 करोड़ शौचालयों का निर्माण, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना, पोषण और स्वास्थ्य योजनाएं, मातृत्व लाभ, सेना और वायुसेना में महिलाओं की भागीदारी जैसे कई कदम शामिल हैं। इसी कारण देश की महिलाओं का भरोसा लगातार उनके साथ बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं को डर है कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाएं राजनीति में प्रवेश कर स्थापित नेताओं और परिवारों को चुनौती देंगी। उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर परिवारवाद पर हमला करते हुए कहा कि कुछ दलों में एक ही परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाया जाता है, जिससे आम महिलाओं के लिए अवसर सीमित हो जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों यानी जनगणना और डिलिमिटेशन की प्रक्रिया को देखते हुए 2029 तक इस विधेयक का पूर्ण क्रियान्वयन कठिन प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं को उनके अधिकार के लिए और 5-10 वर्षों तक क्यों इंतजार करना पड़े? उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश की स्थानीय निकायों में लगभग 15 लाख महिला जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन विधानसभा में उनकी संख्या लगभग 400 और लोकसभा में मात्र 78 है। अगर सब कुछ ‘ऑटो मोड’ पर होता तो महिलाएं स्वतः उच्च स्तर की राजनीति में पहुंच जातीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसलिए नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि लोहा जितना तपता है, उतना ही मजबूत होता है और सोना जितना आग में तपता है, उतना ही चमकता है। देश की बेटियां भी उसी तरह संघर्ष कर अपना स्थान बनाएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री देश की बेटियों के साथ हैं और उन्हें उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

दिल्ली भाजपा प्रवक्ता एवं विधायक शिखा रॉय द्वारा संयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक पूनम भारद्वाज, दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष योगिता सिंह, लता गुप्ता एवं सुनीता कांगड़ा, मंत्री सारिका जैन एवं सोना कुमारी, महिला मोर्चा अध्यक्ष ऋचा पांडेय, प्रभारी श्याम बाला और महामंत्री सरिता तोमर उपस्थित रही। सभी ने मुख्यमंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में हाथ उठा कर नारी शक्ति वंदन अधिनियम एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में नारे लगाए।

प्रेस कॉन्फ्रेस में विधायक शिखा राय ने कहा कि भाजपा ने इस नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर अपनी सोच और नीयत उसी वक्त स्पष्ट कर दी थी जब रेखा को मुख्यमंत्री बनाया था। उन्होंने कहा कि ये सीढ़ी थी बाकी महिलाओं के लिए जो राजनीति में आना चाहती थी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

Share this story