रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई के लिए अपार संभावनाएं: राजनाथ सिंह

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रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई के लिए अपार संभावनाएं: राजनाथ सिंह


रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई के लिए अपार संभावनाएं: राजनाथ सिंह


नोएडा, 01 सितंबर (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा में आयोजित उद्यमियों के एक कार्यक्रम में कहा कि रक्षा विनिर्माण में भी एमएसएमई सेक्टर के लिए अपार संभावनाएं है। आईडेक्स और अदिति जैसे पहल ने स्टार्ट-अप्स, इनोवेटर्स और एमएसएमई को सशस्त्र बल की जरूरतों के लिए नवोन्मेषी समाधान विकसित करने का मौका दिया है। देश के एमएसएमई एंटरप्रेन्योर्स को रक्षा क्षेत्र को केवल सरकारी खरीद बाजार समझने से बचना होगा।

इसे टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और वैश्विक कारोबार के मौके के रूप में देखना होगा। ड्रोन्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर्स, ऑटोनोमस सिस्टम्स, एडवांस्ड मटेरियल्स, स्पेस, और क्वांटम टेक्नोलॉजी में भविष्य की संभावनाएं हैं। यहां जल संरक्षण संकल्प के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की गई। रक्षामंत्री ने कार्यक्रम के शुभारंभ के तरीके की सराहना की।

तिलपता गांव के पास स्थित एक बैंक्वेट हॉल में मंगलवार को इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) की 35वीं वार्षिक जनरल मीटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट और एमएसएमई अवार्ड कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें प्रदेश के 1000 से अधिक उद्यमियों ने भाग लिया।

रिसोर्स पर बोलते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मंगलवार को डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के सीएमडी के साथ तीन घंटे बैठक की। जहां पता चला कि 16000 एमएमएमई उद्योग डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग से जुड़े हैं। विकसित भारत में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका है। आने वाले समय में यह भूमिका और बढ़ने वाली है। विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक रूप से मजबूत भारत ही नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा भारत है जो विनिर्माण में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होगा। जो टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में अग्रणी होगा। युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करेगा। एमएसएमई शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक आर्थिक गतिविधियां पहुंचा रहे है। इससे रोजगार पैदा होने के साथ युवा सशक्त हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया एक बहुत ही विश्वसनीय विनिर्माण पार्टनर की तलाश कर रही है। यह भारत के लिए बड़ा अवसर होगा। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत यूएई, यूके, ओमान, स्विट्जरलैंड जैसे अनेक महत्वपूर्ण देशों और यूरोपीय संघ जैसे महत्वपूर्ण ग्लोबल पार्टनर के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। जो एमएसएमई उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि एमएसएमई उद्योगों को केवल घरेलू सप्लायर तक सीमित नहीं रखना है बल्कि ग्लोबल एंटरप्रेन्योर्स बनाना होगा। हमारा लक्ष्य मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया, एंड मेक फॉर द वर्ल्ड होना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत का सपना केवल बड़ी कार्यशालाओं से पूरा नहीं होगा, इसके लिए देश के हर छोटे उद्यमी को बड़ा सोचने और बड़ा बनने का अवसर देना होगा। सरकार यह काम कर रही है। रक्षा निर्माण और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उद्यमी अब केवल उत्पाद ही नहीं, बल्कि बौद्धिक संपदा बनाकर देश की सुरक्षा व अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं।

वर्ष 2012-13 के आसपास देश में एमएसएमई की संख्या 4.67 करोड़ थी। जो आज लगभग 9 करोड़ पहुंच चुकी है। यह बदलती आर्थिक शक्ति का एक नमुना है। रक्षा विनिर्माण में भी एमएसएमई के लिए अपार संभावना है। देश के एमएसएमई से कहना कि रक्षा सेक्टर को केवल मार्केट ना समझे, इसे तकनीकी, इनोवेशन और ग्लोबल अवसर के रूप में देखना होगा। वो रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, एआई, एडवांस मेडिकल पर काम करना होगा। इनोवेशन पर काम करना होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी

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