शिक्षा के नाम पर बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाकर धर्मान्तरण की आशंका, एनआईए से हो जाचं — डॉ. मन्नालाल रावत

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शिक्षा के नाम पर बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाकर धर्मान्तरण की आशंका, एनआईए से हो जाचं — डॉ. मन्नालाल रावत


उदयपुर, 18 जुलाई (हि.स.)। उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने शिक्षा के नाम पर बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाने के मामले में कथित धर्मांतरण की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन के साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से जांच कराने का आग्रह किया है।

सांसद डॉ. रावत ने कहा कि हाल ही में गोवा में उदयपुर जिले के सात बच्चों को तमिलनाडु ले जाते हुए पकड़ा गया। इनमें दो बालिकाएं और पांच बालक शामिल हैं। बच्चों को गोवा से रेस्क्यू कर शनिवार को उदयपुर लाया गया, जहां बाल कल्याण समिति ने उनके संरक्षण और आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ अन्य बच्चों को पहले ही तमिलनाडु पहुंचाया जा चुका है तथा पूरा मामला सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होता है।

सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के अनुसार झाड़ोल तहसील के विभिन्न गांवों के सात से 12 वर्ष आयु वर्ग के इन बच्चों को तमिलनाडु में स्कूल में प्रवेश दिलाने के नाम पर ले जाया जा रहा था। उदयपुर से बच्चों को पहले बस द्वारा अहमदाबाद और वहां से ट्रेन के जरिये गोवा ले जाया गया। गोवा रेलवे स्टेशन पर एक साथ सात बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में देखकर किसी व्यक्ति ने रेलवे पुलिस को सूचना दी। इसके बाद गोवा की बाल कल्याण समिति सक्रिय हुई।

गोवा बाल कल्याण समिति ने उदयपुर की बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष यशोदा पणियां को पूरे मामले की जानकारी दी। सूचना मिलने पर अध्यक्ष यशोदा पणियां ने बच्चों को वापस लाने के लिए पुलिस जाब्ते के साथ टीम गोवा भेजी। टीम शनिवार को बच्चों को लेकर उदयपुर पहुंची।

सांसद डॉ. रावत ने बताया कि बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष यशोदा पणियां ने बच्चों से बातचीत की। बच्चों ने बताया कि वे झाड़ोल क्षेत्र के निवासी हैं और वहां चर्च भी जाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि जहां उन्हें पढ़ाई के नाम पर ले जाया जा रहा था, वहां पहले से उदयपुर के कुछ बच्चे रह रहे हैं। ऐसे कम से कम 15 बच्चों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। सांसद ने कहा कि इस खुलासे से क्षेत्र में आक्रोश फैलने की संभावना है।

सांसद ने कहा कि उदयपुर पहुंचने के बाद बच्चों के साथ-साथ उनके परिजनों और ग्रामीणों से भी विस्तृत जानकारी ली जानी चाहिए। बच्चों के परिजनों को भी बुलाया जा रहा है। बाल कल्याण समिति और पुलिस द्वारा संपूर्ण एवं गहन पड़ताल के बाद ही बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा।

डॉ. मन्नालाल रावत ने आरोप लगाया कि उदयपुर संभाग के कई क्षेत्रों में कथित ईसाई मिशनरियों का एक सुनियोजित इकोसिस्टम आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता और विभिन्न प्रलोभन देकर अवैध धर्मान्तरण की गतिविधियों में संलग्न है। उन्होंने कहा कि कानुवाड़ा-उदयपुर, बिछीवाड़ा-डूंगरपुर तथा कलिंजरा-बांसवाड़ा सहित 15 से अधिक मामले उनके संज्ञान में आ चुके हैं।

उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ने के बाद अब कथित रूप से बच्चों और लोगों को राजस्थान से बाहर ले जाकर यह गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि शिक्षा के नाम पर बच्चों को बाहर ले जाकर उन्हें धीरे-धीरे उनकी संस्कृति से अलग करने का प्रयास किया जा सकता है।

सांसद डॉ. रावत ने कहा कि हाल ही में छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीटीआई जैसे मंचों से जुड़े मामलों तथा कानुवाड़ा थाना, ऋषभदेव प्रकरण में सामने आए ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन को देखते हुए इस मामले की भी उसी प्रकार गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल लेन-देन और अंतरराज्यीय नेटवर्क की निष्पक्ष जांच की जाए तो पूरे तंत्र का खुलासा हो सकता है।

सांसद ने केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में तत्काल एसआईटी गठित करने तथा पूरे मामले की जांच सीबीआई, एनआईए और आईबी से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच के माध्यम से धर्मान्तरण से जुड़े कथित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, उनसे जुड़े समर्थक एनजीओ, राजनीतिक संगठनों तथा अन्य संस्थाओं की भूमिका सामने आ सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

शिक्षा के नाम पर बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाने की सूचना मिलने के बाद विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत मंत्री सुंदरजी कटारिया ने भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। परिषद के कार्यकर्ता करण राजपुरोहित सहित अन्य पदाधिकारी बाल कल्याण समिति पहुंचे और मामले की जानकारी प्राप्त कर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।

पूरे मामले में सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं बच्चों को सुरक्षित उदयपुर लाकर बाल कल्याण समिति के संरक्षण में रखा गया है। अब पुलिस, बाल कल्याण समिति और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

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