कांग्रेस ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में लगाया खामियों का आरोप

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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में लगाया खामियों का आरोप


नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) में खामियों का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि इस योजना के 94.53 प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खाते फर्जी हैं, जबकि करीब 61 लाख प्रशिक्षकों की जानकारी अधूरी है।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथ ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के हवाले से कहा, मोदी सरकार ने नेशनल स्किल डेवलपमेंट मिशन को नया नाम देकर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के रूप में पेश किया, लेकिन सात साल में इस योजना के लिए बांटे गए 10 हजार करोड़ रुपये में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। 94.53 प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खाते फर्जी पाए गए, करीब 61 लाख प्रशिक्षकों की जानकारी अधूरी है और 97 प्रतिशत मूल्यांकनकर्ताओं का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रशिक्षण पूरा करने वालों के ई-मेल और मोबाइल नंबरों में भी भारी गड़बड़ी है। एक लाख ई-मेल को एक करोड़ लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया। नीलिमा मूविंग पिक्चर्स नामक कंपनी ने 33 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का दावा किया, जबकि यह कंपनी पिछले कई वर्षों से बंद है। इसी तरह जयपुर कल्चरल सोसाइटी ने 31 फरवरी को प्रशिक्षण आयोजित करने का दावा किया, जो तारीख ही अस्तित्व में नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से लेकर नामांकन, प्रमाणन और प्लेसमेंट तक हर स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। केरल की एक कंपनी में ऑडिट के दौरान यह भी सामने आया कि वहां प्रशिक्षित लोगों का प्लेसमेंट ही नहीं हुआ। इस पूरे मामले की कड़ी जांच कराई जाए और सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने कहा कि यह न केवल टैक्स देने वालों के साथ धोखा है बल्कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने जुलाई 2015 में यह योजना शुरू की थी। कांग्रेस नेता के मुताबिक इसकी 2025 की ऑडिट रिपोर्ट-20 में इसके क्रियान्वयन में गंभीर खामियां बतायी गयी हैं। 94.53 प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खाते विवरण शून्य, ‘नल’ या खाली पाए गए। 95.9 लाख प्रतिभागियों में से 90.66 लाख के खाते अमान्य थे, जबकि 12,122 खाते 52,381 बार दोहराए गए। कई खातों में ‘111111…’, ‘123456…’ जैसे गलत नंबर दर्ज थे। डीबीटी भुगतान 2023 में केवल 25.58 प्रतिशत मामलों में प्रोसेस हुआ और सफल भुगतान मात्र 18.44 प्रतिशत रहे। अक्टूबर 2024 तक यह आंकड़ा 63.75 प्रतिशत तक बढ़ा। ई-मेल और मोबाइल नंबरों में भी गड़बड़ी सामने आई। 2.72 लाख ईमेल ‘नल’, 3.08 लाख दोहराए गए और 175 मोबाइल नंबर अमान्य पाए गए। तस्वीरों की नकल और बंद प्रशिक्षण केंद्रों की शिकायतें भी दर्ज हुईं। नीलिमा मूविंग पिक्चर्स जैसी कंपनियों ने हजारों प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने का दावा किया, जबकि वे अस्तित्व में ही नहीं थीं।

गोपीनाथन के मुताबिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विशिष्ट नौकरी भूमिकाओं के लिए बाजार की मांग का ठोस आकलन नहीं किया गया। परिणामस्वरूप योजना की कुल प्लेसमेंट दर केवल 41 प्रतिशत रही। वित्तीय उपयोग में भी कमी रही। पीएमकेवीवाई 2.0 और 3.0 के तहत राज्यों को जारी 1,380.87 करोड़ रुपये में से मार्च 2024 तक केवल 277.40 करोड़ (20.09 प्रतिशत) खर्च नहीं हो पाए। कोविड से पहले 757.82 करोड़ में से मात्र 149.85 करोड़ रुपये ही उपयोग हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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