(साक्षात्कार) उप्र में सपा के साथ गठबंधन को लेकर राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देगी कांग्रेसः राजेन्द्र पाल गौतम

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(साक्षात्कार) उप्र में सपा के साथ गठबंधन को लेकर राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देगी कांग्रेसः राजेन्द्र पाल गौतम


प्रशांत शेखर मिश्र

नई दिल्ली, 06 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा है कि विधानसभा के आगामी चुनाव में पार्टी का फोकस सामाजिक न्याय, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, दलित उत्पीड़न, छात्र हित जैसे मुद्दों पर रहेगा। कांग्रेस प्रदेश के सभी 75 जिलों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के अभियान में जुटी है और जल्द ही गांव-गांव तक पार्टी की सक्रिय मौजूदगी दिखाई देगी। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है। उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस पार्टनर हैं। ऐसी स्थिति आएगी ही नहीं कि दोनों दलों में सीट बंटवारे पर बात न बने। सीट बंटवारे पर हम राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देंगे। हम बराबरी और सम्मान के साथ सीट बंटवारा चाहते हैं।

गौतम ने हिन्दुस्थान समाचार के साथ बातचीत में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेपर लीक, बेरोजगारी, दलित राजनीति, बसपा के घटते जनाधार, परिसीमन, चुनाव आयोग की भूमिका और योगी सरकार के कामकाज समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश-

सवाल: दिल्ली की राजनीति के बाद उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी बनना कितनी बड़ी चुनौती है?

जवाब: मैं समझता हूं कि यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। कांग्रेस का कोर वोटर कभी दलित, मुस्लिम, अति पिछड़ा, ब्राह्मण और गरीब वर्ग रहा है। हमारा पहला काम इन्हीं तमाम वोटरों को फिर से पार्टी के साथ जोड़ना है। यही सबसे बड़ी चुनौती है और हम इसे स्वीकार करते हैं। इसके लिए हम लगातार पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे, सभी 75 जिलों में जाएंगे। गांव-गांव तक कार्यकर्ताओं और संगठन को जोड़ते हुए डेढ़ महीने के भीतर बूथ स्तर तक पूरा संगठन तैयार कर देंगे; संगठन निर्माण का यह काम पहले से चल रहा है। इसके साथ ही हम किसानों, दलितों, मजदूरों, अल्पसंख्यकों, छात्रों, युवाओं और महिलाओं से जनसंवाद करेंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर जनता का घोषणा-पत्र तैयार करेंगे।

सवाल: उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय अपनी आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उनके साथ तालमेल बिठाने और गुटबाजी खत्म करने का आपका क्या रोडमैप है?

जवाब: हमारी पूरी टीम में पहले से ही बेहतर तालमेल है। जो टीम मेरे साथ काम करेगी, उसके साथ पूरे सामंजस्य के साथ काम शुरू हो चुका है।

सवाल: राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को क्या कांग्रेस आगामी चुनाव में मुद्दा बनाने जा रही है?

जवाब: अगर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है तो ट्रस्ट यह बताए कि फिर चोरी कैसे हो गई? इस ट्रस्ट को किसने बनाया? देश ने तो इसे नहीं बनाया। इसमें सिर्फ एक ही पार्टी के लोग क्यों हैं? सामान्य समाज के लोगों को इसमें क्यों नहीं शामिल किया गया? भाजपा इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। इन्होंने लोगों की आस्था का इस्तेमाल सिर्फ राजनीति और सत्ता पाने के लिए किया है। हमारा साफ मानना है कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए और न ही धर्म को राजनीति से जोड़ना चाहिए।

सवाल: उत्तर प्रदेश में पेपर लीक, बेरोजगारी और आवारा पशुओं जैसे मुद्दों को लेकर आप जनता के बीच कैसे जाएंगे?

जवाब: इन तमाम मुद्दों को लेकर हम प्रदेश के गांवों में जाएंगे और किसानों से संवाद करेंगे। चाहे एमएसपी का मुद्दा हो, फसल बिक्री का हो या आवारा पशुओं का, हम हर मुद्दे पर बात करेंगे। अपनी यात्रा के दौरान हम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाकर युवाओं और छात्रों से संवाद करेंगे। जब तक देश में कांग्रेस की सरकार थी, तब तक एसएससी, सीबीएसई, यूपीएससी और आरआरबी जैसी संस्थाएं परीक्षाएं कराती थीं और पेपर लीक नहीं होते थे। जब से इन्होंने प्राइवेट एजेंसियां लगाई हैं तब से यह खेल शुरू हुआ है। पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस का पूरे देश में आंदोलन चल रहा है। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में युवा कांग्रेस, एनएसयूआई और हमारे बड़े नेताओं ने प्रदर्शन किए हैं और आगे भी यह लड़ाई जारी रहेगी।

सवाल: उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी चुनाव में पार्टी किस एजेंडे के साथ उतरेगी?

जवाब: देखिए, हर क्षण परिस्थितियां बदलती हैं। इस बार हमारा मुख्य मुद्दा सामाजिक न्याय होगा, जिसके अंतर्गत बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, दलित छात्रों की स्कॉलरशिप, किसानों की समस्याएं और गन्ना किसानों का बकाया जैसे तमाम मुद्दे आ जाते हैं। शिक्षा को महंगा करके गरीब बच्चों से छीन लिया गया है, इसलिए सस्ती शिक्षा हमारा बड़ा मुद्दा होगा। किसानों को उर्वरक और उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है, वहीं गन्ना किसानों का सरकारी बकाया बहुत लंबे समय से अटका हुआ है। इन तमाम मुद्दों को लेकर हम गरीब, किसान, छात्र, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यकों, शोषितों और वंचितों के साथ संवाद करके एक साझा एजेंडा तय करेंगे और उसी के साथ आगे बढ़ेंगे।

सवाल: क्या आपको मायावती की 'काट' के तौर पर लाया गया है? बसपा के बचे हुए कोर दलित वोट बैंक को कांग्रेस के पाले में लाने के लिए आपकी क्या रणनीति है?

जवाब: कोई भी मतदाता किसी पार्टी का गुलाम नहीं होता, जनता जागरूक है और मुद्दों के आधार पर जुड़ती है। इसमें कोई शक नहीं कि जितना काम दलितों के लिए कांग्रेस ने किया, उतना किसी ने नहीं किया। दलितों को आरक्षण से लेकर अधिकार तक कांग्रेस ने ही दिए। डॉ. अंबेडकर के निधन के बाद उनकी योजनाओं को कांग्रेस सरकार ने ही लागू किया। कांग्रेस के समय गरीब, पिछड़े और दलितों के बच्चों को इतनी छात्रवृत्ति मिल जाती थी कि वे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेसर और ब्यूरोक्रेट बनकर अपना सपना पूरा करते थे, लेकिन आज वह छात्रवृत्ति समाप्त कर दी गई है।

सवाल: मायावती के ढहते किले के बीच आप दलितों की पहली पसंद कैसे बनेंगे? साथ ही चंद्रशेखर आजाद को आप चुनौती मानते हैं या भावी सहयोगी?

जवाब: आज की लड़ाई चुनाव जीतने या हारने की नहीं, बल्कि देश को बचाने की है। बसपा जैसी पार्टियां भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकतीं। जब देश में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी जैसी बड़ी पार्टियों को तोड़ दिया गया, तो एक-आध विधायक वाली छोटी पार्टियां भाजपा के सामने कैसे टिकेंगी? क्या कोई स्थानीय दल राष्ट्रीय स्तर पर किसी समाज के लिए बड़ी योजना बना सकता है? नहीं। यह बात अब जनता को समझ आ रही है। इसलिए जो भी संविधान पसंद, मानवतावादी, समतावादी और सामाजिक न्याय को मानने वाले लोग हैं, वे इंडिया ब्लॉक में आएं ताकि मिलकर देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों का मुकाबला किया जा सके।

सवाल: उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं को पूरी तरह अपने पाले में लाने के लिए कांग्रेस की क्या खास रणनीति है?

जवाब: हम समाज के बीच जाकर उन्हें यह अहसास कराएंगे कि कांग्रेस के समय उन्हें क्या सुविधाएं मिलती थीं और इस सरकार ने उनसे क्या-क्या छीन लिया है। इसके बाद पूरा दलित समाज कांग्रेस के साथ एकजुट होगा।

सवाल: कांग्रेस पर हमेशा दलितों को सिर्फ 'वोट बैंक' समझने का आरोप लगता है। आप इस धारणा को कैसे बदलेंगे?

जवाब: यह आरोप पूरी तरह गलत है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे दलित हैं। पार्टी की दो वरिष्ठ महासचिव मुकुल वासनिक और कुमारी सैलजा दलित हैं। मैं खुद उत्तर प्रदेश का प्रभारी हूं और दलित समाज से आता हूं। दलितों के विकास की तमाम योजनाएं कांग्रेस ने ही बनाईं और झुग्गियों में रहने वाले जिन गरीब लोगों को कांग्रेस ने पक्के मकान दिए, उनमें से अधिकांश दलित ही थे।

सवाल: क्या कांग्रेस प्रदेश में सपा पर निर्भर हो चुकी है या अपने दम पर लड़ेगी? गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में कौन होगा?

जवाब: यह लोगों की गलतफहमी है, कांग्रेस किसी पर निर्भर नहीं है। हम वह राष्ट्रीय पार्टी हैं जिसने आजादी का आंदोलन लड़ा, जिसके लाखों कार्यकर्ता जेल गए और शहीद हुए। कांग्रेस ने ही आधुनिक भारत का सपना साकार किया है, इसलिए हम राज्य के अंदर भी बड़े भाई की भूमिका में हैं, लेकिन सपा और कांग्रेस पार्टनर हैं। हम सीट बंटवारे में बराबरी और सम्मान के साथ, बराबर की सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।

सवाल: अगर सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी, तो क्या कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी?

जवाब: हर समय परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। हमारा गठबंधन बहुत पक्का है और ऐसा नहीं होगा कि सीट शेयरिंग पर बात न बने। सीट बंटवारे पर हम परिपक्वता का परिचय देंगे।

सवाल: योगी सरकार की घेराबंदी के लिए प्रभारी के तौर पर आपके मुख्य तीन एजेंडे क्या होंगे?

जवाब: आगामी चुनावों में हमारे तीन सबसे बड़े मुद्दे दलित उत्पीड़न, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और छात्र उत्पीड़न के खिलाफ लड़ना होगा। वर्तमान सरकार पूरी तरह दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक विरोधी है। हम जनता के सामने यह डेटा रखेंगे कि इस सरकार ने पुलिस, सचिवालय, अस्पतालों और नीति निर्धारक संस्थानों में कितने पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को नौकरियां दी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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