किसानों के लिए नुकसानदेह अमेरिकी ट्रेड डील पर मलेशिया से सबक ले सरकार : जयराम रमेश
नई दिल्ली, 23 जून (हि.स.)। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश का कहना है कि भारत पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका व्यापार के दौरान कानूनों का उल्लंघन करने वाली जांच का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि भारत 6 फरवरी को घोषित ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर दे। उन्होंने कहा कि यह डील भारत के हितों के खिलाफ है और इससे विभिन्न राज्यों के किसानों को गंभीर नुकसान होगा। भारत को किसी भी ऐसी ट्रेड डील के झांसे में आने से बचते हुए मलेशिया से सबक लेना चाहिए, जिसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील को ठुकरा दिया।
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि भारत लगभग 60 अन्य देशों के साथ अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करने वाली गलत ट्रेड प्रैक्टिस के आरोप में जांच के दायरे में है। इस जांच के अंतिम निष्कर्ष आने वाले कुछ सप्ताहों में सामने आ सकते हैं। अमेरिका बहुत कम ठोस प्रतिबद्धताएं करता है, जबकि भारत को अपने मौजूदा वार्षिक आयात स्तर को कम से कम तीन गुना करने की प्रतिबद्धता जतानी पड़ रही है।
रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में राहुल गांधी द्वारा चीन के मुद्दे उठाए जाने के दबाव में अमेरिका के साथ संयुक्त बयान जारी किया था। इस बयान में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का वादा किया था, जबकि भारत ने अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ समाप्त करने या भारी कटौती करने तथा पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक की खरीद करने का वादा किया था।
रमेश ने कहा कि 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक आयात शुल्क) नीति को अवैध करार दिया, जिससे भारत को दी गई टैरिफ रियायत रातोंरात समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिका ने भारत सहित सभी व्यापारिक साझेदारों पर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, जिसका कानूनी आधार 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जापान और यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील होने के बावजूद अमेरिका ने उन पर भी टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। ऐसे में भारत को किसी भी ऐसी ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने के लिए झांसे में नहीं आना चाहिए जो देश के हितों के खिलाफ हो। रमेश ने सुझाव दिया कि मोदी सरकार को मलेशिया से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील को ठुकरा दिया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

