मोदी सरकार ने ओबीसी समाज को सम्मान और अधिकार ही नही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को दिया संवैधानिक दर्जा : तोखन साहू

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मोदी सरकार ने ओबीसी समाज को सम्मान और अधिकार ही नही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को दिया संवैधानिक दर्जा : तोखन साहू


मोदी सरकार ने ओबीसी समाज को सम्मान और अधिकार ही नही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को दिया संवैधानिक दर्जा : तोखन साहू


रायपुर, 07 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि मोदी सरकार ने ओबीसी समाज को सम्मान और अधिकार देने का काम किया है।

केंद्रीय राज्यमंत्री साहू सोमवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में प्रबुद्धजन सम्मेलन एवं भाजपा ओबीसी मोर्चा की संभागीय बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद सामाजिक न्याय को केवल बातों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर उसे धरातल पर उतारा गया। प्रधानमंत्री ने अपनी मेहनत और संघर्ष से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचकर यह साबित किया है कि नए भारत में अवसर किसी परिवार की जागीर नहीं, बल्कि मेहनत और प्रतिभा के आधार पर हासिल किए जा सकते हैं।

उन्होंने ओबीसी समाज की एकजुटता, सामाजिक सशक्तीकरण और संगठन की मजबूती पर विस्तार से अपने विचार रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग की लगभग 67 जातियाँ आती हैं। हमारी जातियाँ भले अलग-अलग हों, लेकिन हमारी परंपराएं, रहन-सहन और सांस्कृतिक मूल्य एक हैं। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें किसी छोटे दायरे में नहीं बंधना है, बल्कि अपनी एकजुटता को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बनाना है।

उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व का विषय है कि भारत की आधी से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य ओबीसी समुदाय और तेली समाज से निकले बेटे प्रधानमंत्री मोदी को मिला है। यह पूरे ओबीसी समाज के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में ओबीसी समाज से दो प्रधानमंत्री बने हैं—एच. डी. देवगौड़ा (1996–1997), वोक्कालिगा समुदाय से और नरेन्द्र मोदी (2014 से निरंतर), घांची/तेली समुदाय से।

साहू ने कहा कि 1953 में काका कालेलकर आयोग का गठन हुआ और 1955 में उसकी रिपोर्ट आई, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 1979 में मोरारजी देसाई जी की सरकार में मंडल आयोग का गठन हुआ। आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की। 1990 में वीपी सिंह की सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर ओबीसी आरक्षण लागू किया, जिसके बाद 1992 में उच्चतम न्यायालय ने इंद्रा साहनी मामले में इसे संवैधानिक मान्यता दी।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लंबे समय तक पिछड़ा वर्ग आयोग को वह अधिकार नहीं मिले, जो उसे मिलने चाहिए थे। आजादी के बाद लगभग 75 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में करीब छह दशक तक कांग्रेस सत्ता में रही, लेकिन पिछड़े वर्गों के सामाजिक और राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि 2018 में 102वें संविधान संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया और उसे सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां प्रदान की गईं। 2019 में अलग से मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय बनाया गया, जिससे मछुआरा समाज और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को लाभ मिला। उन्होंने यह भी कहा कि 105वें संविधान संशोधन के माध्यम से राज्य सरकारों को अपनी ओबीसी सूची तैयार करने का अधिकार वापस दिया गया। उन्होंने ओबीसी समाज के सभी लोगों से एकजुट होकर संगठन को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री अजय जामलाल , वित्त मंत्री ओपी चौधरी , प्रदेश ओबीसी मोर्चा प्रभारी लखन साहू जी, प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी मोर्चा अशोक साहू सहित संगठन के पदाधिकारी, ओबीसी मोर्चा के कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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