युवाओं के तकनीकी समाधानों से आसान होगी साइबर अपराधों की जांच: हर्ष संघवी

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युवाओं के तकनीकी समाधानों से आसान होगी साइबर अपराधों की जांच: हर्ष संघवी


- सूरत में ई-रक्षक हैकाथॉन का समापन, छह राज्यों की 31 टीमों ने प्रस्तुत किए तकनीकी समाधान, प्राथमिकी दर्ज करने और साइबर अपराध सुलझाने में होगा उपयोग

सूरत, 10 अक्टूबर (हि.स.)। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि युवाओं द्वारा विकसित तकनीकी समाधानों का उपयोग आने वाले दिनों में प्राथमिकी दर्ज करने और साइबर अपराधों की जांच की सरकारी प्रक्रिया में किया जाएगा। उन्होंने उपकरणों पर निर्भरता बढ़ाने के बजाय सॉफ्टवेयर आधारित टिकाऊ समाधान विकसित करने पर जोर दिया।

सूरत शहर पुलिस और सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एसवीएनआईटी) की नेक्सस इकाई द्वारा आयोजित ई-रक्षक हैकाथॉन के समापन समारोह में हर्ष संघवी उपस्थित रहे। उन्होंने छह राज्यों के 13 से अधिक विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों की 31 टीमों द्वारा तैयार किए गए साइबर सुरक्षा और डिजिटल चुनौतियों के समाधान से जुड़े नमूनों का अवलोकन किया।

आयोजकों के अनुसार देशभर के महाविद्यालयों से 458 विद्यार्थियों ने इस आयोजन के लिए पंजीकरण कराया था। इनमें से 31 टीमों के 150 से अधिक विद्यार्थी अंतिम चरण में शामिल हुए।

गुजरात के सभी सीसीटीवी कैमरों को एक मंच से जोड़ने की योजना

संघवी ने कहा कि तकनीक जहां सुविधाएं बढ़ाती है, वहीं नई चुनौतियां भी पैदा करती है। उपकरणों और कैमरों के मॉडल बार-बार बदलने से सरकारी व्यवस्था पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ सकता है। ऐसे में युवाओं के सॉफ्टवेयर आधारित समाधान उपयोगी साबित हो सकते हैं।

उन्होंने यातायात प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कैमरों के समन्वित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि यातायात संकेतों पर नागरिकों के केवल 15 सेकंड बचाने से भी बड़े स्तर पर समय और ईंधन की बचत हो सकती है। उन्होंने गुजरात के सभी सीसीटीवी कैमरों को एक ही नियंत्रण मंच से जोड़ने की अपनी योजना का भी उल्लेख किया।

संघवी ने कहा कि सरकार युवाओं के नवाचारों को व्यवहार में लाने के लिए सहयोगी की भूमिका निभाने को तैयार है।

पुलिस की समस्याओं के आधार पर तय किए गए विषय

सूरत के पुलिस आयुक्त वाबांग जमीर ने कहा कि ई-रक्षक हैकाथॉन का उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों से ऐसे नए तकनीकी समाधान प्राप्त करना है, जिनसे साइबर अपराधों की रोकथाम और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) विशाखा जैन ने बताया कि पुलिस थानों में प्रत्यक्ष सर्वेक्षण करके आम नागरिकों की दैनिक समस्याओं और पुलिस की कार्यप्रणाली में आने वाली चुनौतियों की पहचान की गई। इनके आधार पर प्रतियोगिता के लिए नौ से दस समस्या-आधारित विषय निर्धारित किए गए थे।उन्होंने बताया कि देशभर के महाविद्यालयों से 458 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। अंतिम चरण में 31 टीमों के 150 से अधिक विद्यार्थी अपने तकनीकी समाधान लेकर पहुंचे।

सूरत साइबर अपराध शाखा की सराहना

हर्ष संघवी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय साइबर अपराध गिरोहों का पर्दाफाश करने के लिए सूरत साइबर अपराध शाखा की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं की तकनीकी प्रतिभा को सरकारी कार्यप्रणाली से जोड़ने से अपराधों की जांच और रोकथाम में सहायता मिल सकती है।

कार्यक्रम में रेंज पुलिस महानिरीक्षक प्रेमवीरसिंह, जिला कलेक्टर तेजस परमार, नगर निगम आयुक्त राजकुमार बेनीवाल, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त बलराम मीणा, डॉ. करणराज वाघेला, महिसागर के पुलिस अधीक्षक शफीन हसन, पुलिस उपायुक्त विशाखा जैन तथा एसवीएनआईटी के निदेशक प्रो. अनुपम शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

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