विश्व धरोहर दिवस पर इर्रम मंजिल में स्वच्छता अभियान व ट्रेजर हंट, संरक्षण को लेकर नई पहल

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विश्व धरोहर दिवस पर इर्रम मंजिल में स्वच्छता अभियान व ट्रेजर हंट, संरक्षण को लेकर नई पहल


विश्व धरोहर दिवस पर इर्रम मंजिल में स्वच्छता अभियान व ट्रेजर हंट, संरक्षण को लेकर नई पहल


विश्व धरोहर दिवस पर इर्रम मंजिल में स्वच्छता अभियान व ट्रेजर हंट, संरक्षण को लेकर नई पहल


हैदराबाद, 18 अप्रैल (हि.स.)। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर शनिवार को कुली कुतुब शाह अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने शहर के ऐतिहासिक इर्रम मंजिल पैलेस में स्वच्छता अभियान और ट्रेजर हंट कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम सड़क एवं भवन विभाग तथा डेक्कन आर्काइव के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान तेलंगाना सरकार के महानगर एवं शहरी विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने इर्रम मंजिल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य सरकार की प्रस्तावित “हेरिटेज पार्टनर स्कीम” के तहत इस धरोहर के संरक्षण और पुनः उपयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया। साथ ही, सफाई अभियान में शामिल 60 से अधिक स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए उन्हें “हेरिटेज एम्बेसडर” के रूप में आगे भी संरक्षण कार्यों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

इतिहास के पन्नों में विशेष स्थान रखने वाला इर्रम मंजिल, जिसका अर्थ “स्वर्ग सदन” है, का निर्माण 19वीं सदी के उत्तरार्ध में नवाब फखर-उल-मुल्क द्वारा कराया गया था। वे सालारजंग परिवार के प्रमुख सदस्य थे और हैदराबाद के निज़ाम का प्रशासन में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थे।

पंजागुट्टा की पहाड़ी पर स्थित यह महल कभी कई एकड़ में फैला हुआ था। इसमें सुंदर बाग-बगीचे, पक्के रास्ते और सैकड़ों कमरे हुआ करते थे, जो इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। स्वतंत्रता के बाद इस इमारत को सरकारी उपयोग में लाया गया, जहां राज्य अभिलेखागार, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई और सड़क एवं भवन विभाग जैसे कई कार्यालय संचालित किए गए।

वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक इमारत का अधिकांश हिस्सा अनुपयोगी पड़ा है। पहले इसे ध्वस्त करने की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन हालिया प्रयासों ने इसके संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागी जब इसके अंदर पहुंचे, तो वे इसकी भव्यता और वास्तुकला को देखकर आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि यह स्थान पिछले एक दशक से आम जनता के लिए लगभग बंद था।

इस अवसर पर ऑथोरिटी की प्रशासक गौथामी पी. ने कहा कि धरोहरों का संरक्षण केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मासिक कार्यक्रमों के साथ एक वार्षिक कैलेंडर की घोषणा की, जिससे लोगों की भागीदारी और बढ़ाई जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj

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