छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले के 2,163 मृत किसानों को भेजी जा रही थी पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि

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छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले के 2,163 मृत किसानों को भेजी जा रही थी पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि


रायपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में प्रधानमंत्री(पीएम)किसान सम्मान निधि योजना के तहत भौतिक सत्यापन के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। रायपुर जिले में 2,163 मृत किसानों की पहचान की गई है, जिनकी मृत्यु के बाद भी उनके बैंक खातों में योजना की राशि भेजी जा रही थी। इस फर्जीवाड़े की शुरुआती जांच में 1,310 किसान अपात्र पाए गए हैं, जो योजना के नियमों के तहत लाभ लेने के योग्य नहीं थे।

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 1,310 अपात्र किसानों की पहचान कर ली गई है। इन सभी के नाम हटाने की सूची बनाकर राज्य मुख्यालय को भेज दी गई है। वर्तमान में इन सभी संदिग्ध खातों को ब्लॉक कर दिया गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज बताया है कि कई मामलों में किसानों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने विभाग को सूचित नहीं किया और गलत तरीके से राशि प्राप्त करना जारी रखा।

रायपुर जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना में यह फर्जीवाड़ा अप्रैल 2026 के मध्य में भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आया है। प्रशासन ने अब तक 11,000 से अधिक संदिग्ध खातों की पहचान की है। इन खातों को ब्लॉक कर दिया गया है और अपात्र किसानों के नाम हटाने के लिए सूची मुख्यालय भेज दी गई है। अपात्र लाभार्थियों से भुगतान की गई राशि की वसूली के लिए कृषि विभाग द्वारा रिकवरी नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।

रायपुर जिले में इस योजना के तहत 92,518 किसान पंजीकृत हैं। कृषि विभाग के भौतिक सत्यापन में यह खुलासा हुआ कि वर्षों तक न तो विभाग ने इनका सत्यापन किया और न ही स्वजनों ने कोई जानकारी दी। इसी लापरवाही का लाभ उठाकर अपात्र और मृत किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान होता रहा।

हाल ही में जारी 22वीं किस्त के तहत जिले के किसानों को 18.71 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए तो इसकी हकीकत सामने आ गई। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब पूरे आंकड़ों की जांच की जा रही है, ताकि अपात्र लोगों से राशि की वसूली की जा सके। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें हितग्राहियों का पंजीयन पूरा है और उनका नाम पात्र सूची में भी शामिल है, फिर भी उनके खाते में राशि नहीं आई है। इससे हितग्राहियों में नाराजगी बढ़ रही है। इनमें रीको गांव के ओमप्रकाश यदु, रामचरण पटेल, दीनानाथ साहू, चितरेखा साहू और रजनीकांत बंजारे शामिल हैं।उन्होंने बताया कि उन्हें पिछले वर्षों में नियमित रूप से योजना की किस्त मिलती रही है। वर्ष 2026 में भी वे पात्र सूची में शामिल हैं। लेकिन इस बार उनके खाते में राशि नहीं आई। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रदेश में लगभग 10 प्रतिशत लाभार्थियों के खाते में वर्ष 2026 की किस्त अब तक नहीं पहुंची है, जबकि उनका नाम पात्र सूची में शामिल है और पंजीयन प्रक्रिया भी पूरी है।अधिकारियों का कहना है कि डेटा में सुधार के लिए 'करेक्शन मॉड्यूल' का उपयोग किया जा रहा है ताकि केवल पात्र किसानों को ही लाभ मिले।शासन के नियमों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कहा है कि मृत या अपात्र किसानों के परिजनों को गलत तरीके से ली गई राशि लौटानी होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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