किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायुः राम माधव

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किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायुः राम माधव


रायपुर, 24 जनवरी (हि.स.)। रायपुर के गौरवशाली आयोजन रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र ने शनिवार को सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया। प्रख्यात विचारक एवं लेखक राम माधव ने अपने तथ्य रखते हुए कहा कि किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायु होता है।

सत्र के मुख्य वक्ता प्रख्यात विचारक एवं लेखक राम माधव ने अपने संतुलित और तार्किक वक्तव्य के माध्यम से भारतीय चेतना को आधुनिक संदर्भों में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और वैश्विक राजनीति से जोड़ते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत का चिंतन न केवल मौलिक है, बल्कि तार्किक कसौटी पर भी पूरी तरह खरा उतरता है।

राम माधव ने इस भ्रांति को भी सशक्त तर्कों के साथ खंडित किया कि बौद्धिकता केवल पश्चिमी दृष्टिकोण तक सीमित है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्र चिंतन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ-साथ आधुनिक यथार्थ को समझने की क्षमता भी रखता है। संवाद के दौरान उनके तर्कों की श्रृंखला ने विद्वानों के साथ-साथ युवाओं और सामान्य श्रोताओं को भी विशेष रूप से प्रभावित किया।

सत्र के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने भी अपने विचार साझा किए, जिससे पूरा वातावरण परंपरा और भविष्य की प्रगति के संतुलन से भरे वैचारिक संवाद में बदल गया। सत्र के समापन पर यह संदेश उभरकर सामने आया कि असहमति भी तभी सार्थक है, जब वह तर्क और मर्यादा के दायरे में हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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