छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ के शराब घोटाले में 20 लोगों और 22 फर्मों-कंपनियों के खिलाफ अदालत में 10वां चालान पेश

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छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ के शराब घोटाले में 20 लोगों और 22 फर्मों-कंपनियों के खिलाफ अदालत में 10वां चालान पेश


छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ के शराब घोटाले में 20 लोगों और 22 फर्मों-कंपनियों के खिलाफ अदालत में 10वां चालान पेश


रायपुर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बुधवार को रायपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में 20 आरोपितों और 22 फर्मों-कंपनियों के खिलाफ 10वां चालान (पूरक चार्जशीट) पेश किया है।

न्यायालयीन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अदालत में पेश किए गए इस 10वें चालान के साथ जांच एजेंसियों ने करीब 27,000 पन्नों के साक्ष्य और दस्तावेज संलग्न किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल (2019-2023) के दौरान हुए इस सिंडिकेट घोटाले के मामले में कांग्रेस के नेता रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर समेत कई अन्य रसूखदार लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट ने आबकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर अवैध कमीशन वसूला। बिना आबकारी शुल्क चुकाए अतिरिक्त शराब तैयार कराई गई और डुप्लीकेट होलोग्राम व फर्जी परिवहन परमिट के जरिए सरकारी दुकानों तक पहुंचाई गई। इस शराब की बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की जाती थी। बिक्री से मिला कैश सिंडिकेट तक पहुंचाया जाता था। चालान में शराब के अवैध उत्पादन, बिना रिकॉर्ड सरकारी दुकानों में अवैध बिक्री (बी-पार्ट लिकर), डुप्लीकेट होलोग्राम का इस्तेमाल, फर्जी परमिट और हवाला-आंगड़िया नेटवर्क के जरिए पैसों के अवैध लेन-देन से जुड़े पुख्ता सबूत शामिल किए गए हैं।

चालान में अवैध रकम को हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए अलग-अलग शहरों और दुबई तक पहुंचाने के आरोपों का भी जिक्र है। जांच एजेंसी ने कैश को बैंक खातों में लोन के रूप में दिखाकर जमीन और अन्य संपत्तियों में निवेश किए जाने से जुड़े साक्ष्य भी शामिल किए हैं।दो आरोपितों बीआर लोहिया और कुमार भाई ठक्कर के खिलाफ फरारी में चालान पेश किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

इसी मामले से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई के तहत जांच एजेंसियों ने आज ही 182.98 करोड़ रुपये के मैनपावर प्लेसमेंट फर्जीवाड़े को लेकर एक और 500 पन्नों का पूरक चालान पेश किया है। एसीबी-ईओडब्ल्यू ने 182.98 करोड़ रुपये के मैनपावर भुगतान से जुड़े मामले में सीएसएमसीएल (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड)के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ 6वां पूरक चालान पेश किया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर 5 कंपनियों ने ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतान लिया, लेकिन कर्मचारियों को यह रकम नहीं दी गई।जांच एजेंसी के मुताबिक, इस तरह शासन को 182 करोड़ 98 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। चालान में भुगतान के रिकॉर्ड, कंपनियों के दस्तावेज, बैंक संबंधी कागजात, कर्मचारियों के बयान और कथित कमीशन के लेन-देन से जुड़े सबूत शामिल हैं।

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने बताया है कि कुल 42 लोगों को आरोपित बनाया गया है। पहले से गिरफ्तार आरोपितों की कंपनियों को भी इस चालान में शामिल किया गया है। चालान पेश होने के बाद अब मामले में अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी।

जांच एजेंसी के अनुसार , मैनपावर कंपनियों से कैश कमीशन इकट्ठा कर त्रिपाठी तक पहुंचाने में सिद्धार्थ सिंघानिया की भूमिका थी। एजेंसी ने बताया कि कंपनियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आने की बात जांच में सामने आई है।दूसरे चालान के मुताबिक, साल 2019 से 2023 के बीच सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली 5 प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसियों को सैलरी, ओवरटाइम और बोनस के नाम पर ₹182.98 करोड़ का फर्जी व अतिरिक्त भुगतान किया गया।

इसमें सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी पर अकेले ₹152.40 करोड़ का फर्जी भुगतान क्लियर करने और बदले में ₹28 से ₹32 करोड़ रुपये का नकद कमीशन वसूलने का आरोप लगाया गया है।

छत्तीसगढ़ के 182.98 करोड़ रुपये के मैनपावर प्लेसमेंट (ओवरटाइम) घोटाले में 5 प्राइवेट एजेंसियों में ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड , अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड, सुमित फैसिलिटीज ,प्राइमवन वर्कफोर्स तथा ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेज शामिल हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

Livevns.news Desk
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