ऊर्जा क्षेत्र में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़, वर्ष 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य

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ऊर्जा क्षेत्र में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़, वर्ष 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य


वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन में छत्तीसगढ़ ने प्रस्तुत की निवेश की व्यापक संभावनाएं

रायपुर, 02 नवंबर (हि.स.)। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज साेमवार काे आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो में छत्तीसगढ़ ने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाओं और भविष्य की अपनी योजनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चार दिवसीय इस वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ किया।

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में आयोजित उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में भाग लिया। उन्होंने अगले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाओं की जानकारी देते हुए देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी तथा केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत 23 हजार 923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये तथा ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार में लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की हरित ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही बिजली की कुल मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी वर्तमान 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 28 हजार मेगावाट से अधिक है। बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ताप विद्युत के साथ-साथ सौर ऊर्जा, जल विद्युत, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का संतुलित विकास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में बिजली की निर्बाध और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा भंडारण सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत 12 हजार 300 मेगावाट की कुल क्षमता वाली 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों में प्रदेश में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के साथ 40 मेगावाट/120 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी भंडारण प्रणाली पहले से संचालित है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव जिले का खैरा गांव छत्तीसगढ़ का पहला पूर्ण रूप से सौर ऊर्जा से संचालित गांव बन गया है। यहां सभी 141 घरों की छतों पर 2-2 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। विशेष बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित 93 घरों में भी सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए ग्रामीणों को कोई खर्च नहीं करना पड़ा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। इनके उपयोग से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार इन संभावनाओं को नए उद्योगों और निवेश के अवसरों में बदलने के लिए कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल 80 मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। इनमें लगभग 800 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त निजी निवेशकों से प्राप्त लगभग 6 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर भी प्रक्रिया जारी है।

वैश्विक निवेशकों के सामने प्रस्तुत की छत्तीसगढ़ की ऊर्जा क्षमता

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन किया। साय ने सम्मेलन में देश-विदेश से आए निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा भी की। उन्होंने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध संसाधनों, ऊर्जा क्षेत्र में विकसित हो रही अधोसंरचना और निवेश के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और नई परियोजनाओं की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उल्लेखनीय है कि 2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ देश एवं समूह इस आयोजन में कंट्री पार्टनर के रूप में भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित छत्तीसगढ़ के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / चन्द्र नारायण शुक्ल

Livevns.news Desk
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