कस्टम मिलिंग घोटाले में गिरफ्तार कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में
रायपुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के करीब 147 करोड़ रुपये के कथित कस्टम राइस मिलिंग घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। आज (मंगलवार) 5 दिनों की ईडी रिमांड खत्म होने पर उन्हें रायपुर में विशेष अदालत (पीएमएलए)में पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल में भेज दिया है।
ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल को 09 अक्टूबर 2026 को कस्टम मिलिंग घोटाले के मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद विशेष अदालत ने उन्हें 5 दिनों (13 अक्टूबर तक) के लिए ईडी की कस्टडी रिमांड पर सौंपा था। इस मामले की मुख्य चार्जशीट ईडी साल 2024 में ही दाखिल कर चुकी है। वह पहले से ही छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले और कोयला लेवी घोटाले के मामले में जेल में बंद हैं। करीब तीन साल तक फरार रहने के बाद उन्होंने जुलाई 2026 में सरेंडर किया था।
ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल की रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित दो फ्लैटों को 9.06 करोड़ रुपए के बराबर मूल्य की संपत्ति के रूप में अस्थायी रूप से अटैच किया है।
ईडी के मुताबिक, कस्टम मिलिंग घोटाला राइस मिलरों से अवैध रूप से करीब 147 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़ा है। जांच आयकर विभाग द्वारा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दायर अभियोजन शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद रायपुर एसीबी-ईओडब्ल्यू ने भी भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
ईडी की जांच के अनुसार, खरीफ सीजन 2021-22 में कस्टम राइस मिलिंग के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि 40 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल की गई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और मार्कफेड के अधिकारियों से जुड़े एक सिंडिकेट ने राइस मिलरों से प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अवैध नकद वसूली शुरू की।
ईडी का आरोप है कि जो राइस मिलर यह रकम देने से इनकार करते थे, उनके बिल जानबूझकर रोक दिए जाते थे। दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच इस तरीके से करीब 147 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। एजेंसी ने इसे पीएमएलए के तहत अपराध से अर्जित आय माना है।
जांच में ईडी ने दावा किया है कि रामगोपाल अग्रवाल ने राइस मिलरों से अवैध नकद वसूली की व्यवस्था बनाने, उसकी निगरानी करने और उसे नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी के अनुसार, राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के जरिए अवैध रकम वसूलने के निर्देश दिए जाते थे।
इस पैसे को अलग-अलग जिलों से इकट्ठा करके 'छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन' के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर तक पहुँचाया जाता था।
इसके बाद, इस पूरी रकम का ब्यौरा और पैसा कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को सौंपा जाता था, जिन्होंने कथित तौर पर इसका इस्तेमाल पार्टी फंड और राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

