छत्तीसगढ़ के भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में कारोबारी जयप्रकाश गांधी गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में कारोबारी जयप्रकाश गांधी गिरफ्तार


रायपुर, 04 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अभनपुर निवासी कारोबारी जयप्रकाश गांधी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है। प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल ऑफिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस बात की पुष्टि की है।

ईडी की रायपुर जोनल कार्यालय की टीम ने 3 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार 4 जून 2026 (गुरुवार) को आरोपित को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया था। विशेष अदालत ने आरोपित को पूछताछ के लिए 3 दिन की ईडी कस्टडी (रिमांड) में भेज दिया है। 3 दिनों की रिमांड अवधि समाप्त होने पर यानी 7 जून 2026 को ईडी को आरोपित जयप्रकाश गांधी को दोबारा रायपुर की विशेष अदालत में पेश करना होगा। इस दौरान ईडी अदालत को बताएगी कि रिमांड में क्या नए खुलासे हुए हैं और आगे जेल (न्यायिक रिमांड) भेजने या रिमांड बढ़ाने की मांग की जाएगी।

जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर की गई अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है।

ईडी की जांच में पता चला कि जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर, अधिसूचित हाई-वे अलाइनमेंट(सीध) के दायरे में आने वाली जमीन को अधिग्रहित किया और बाद में उसे 500 वर्ग मीटर से कम माप वाले छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया। आरोप है कि जमीन का यह बंटवारा सिर्फ इस इरादे से किया गया था ताकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से ज्यादा मुआवजा हासिल किया जा सके।

जांच में यह भी सामने आया है कि धोखाधड़ी के इस तरीके को अपनाकर, आरोपित और उसके परिवार के सदस्यों ने लगभग 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा हासिल किया, जबकि उन्हें कानूनी तौर पर सिर्फ 56.76 लाख रुपये ही मिलने चाहिए थे। इस तरह उन्होंने लगभग 9.27 करोड़ रुपये की ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ ) जमा कर ली। जांच में आगे यह भी पता चला है कि इस ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ को बाद में शेयरों, म्यूचुअल फंडों और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करके अलग-अलग चरणों में खपाया और वैध संपत्ति के रूप में मिला दिया गया।

इस मामले में ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान मुआवजे की धोखाधड़ी से प्राप्ति से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत बरामद कर जब्त किए गए थे।

सबसे पहले ईडी की टीम ने जयप्रकाश गांधी के अलावा उसके भाई गोपाल गांधी और सत्यप्रकाश गांधी के ठिकानों पर भी जांच की थी। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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