केंद्र सरकार ने समुद्री मत्स्य संसाधनों के मौद्रिक मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की

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नई दिल्ली, 27 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने समुद्री मत्स्य संसाधनों को राष्ट्रीय लेखा ढांचे में शामिल करने के लिए उनकी मौद्रिक परिसंपत्ति लेखांकन प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत मत्स्य संसाधनों की भौतिक स्थिति, परिसंपत्ति जीवन, क्षरण, पुनर्जनन और मौद्रिक मूल्यांकन को एकीकृत ढांचे में लाने की पहल की गई है।

केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने इस संबंध में एक अवधारणा पत्र जारी किया। इस पत्र में बताया कि अब समुद्री मत्स्य संसाधनों को जैविक संसाधन और आर्थिक परिसंपत्ति दोनों रूपों में मान्यता दी जाएगी। मंत्रालय ने चरणबद्ध तरीके से लेखांकन की प्रक्रिया प्रस्तुत की है, जिसमें उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग करते हुए संसाधनों की संपदा में बदलाव को समझने और सतत प्रबंधन के लिए सांख्यिकी की उपयोगिता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

पत्र में कहा गया कि यह पद्धति अभी प्रायोगिक है और मौजूदा डेटा सीमाओं के कारण प्रॉक्सी दृष्टिकोण पर आधारित है। इसके बावजूद सरकार ने संसाधनों की दीर्घकालिक उत्पादक क्षमता और मूल्यांकन को व्यवस्थित रूप से आंकने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।

केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं ताकि इस पद्धति को मानकीकृत रूप दिया जा सके। प्राप्त प्रतिक्रियाएं भारत के राष्ट्रीय लेखा ढांचे में मत्स्य संसाधनों के मौद्रिक मूल्यांकन को अंतिम रूप देने में मदद करेंगी।

इस पहल से भारत प्राकृतिक पूंजी लेखांकन में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच अग्रणी भूमिका निभा सकेगा और मत्स्य संसाधनों के संरक्षण व सतत उपयोग के लिए डेटा आधारित नीतियां बनाने में सक्षम होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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